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पहली बार NDA से अलगाव शिवसेना को महसूस हुआ दर्द!

पहली बार NDA से अलगाव शिवसेना को महसूस हुआ दर्द!
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महाराष्ट्र में सत्ता के बंटवारे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से रिश्ता तोड़ने वाली शिवसेना (Shiv Sena) का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से बाहर होने पर दर्द छलका है. इसको लेकर शिवसेना सांसद और प्रवक्ता संजय राउत (Sanjay Raut) ने भाजपा नीत एनडीए के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने इशारों-इशारों में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से कहा कि अपने आप को भगवान समझना ठीक नहीं है.

शिवसेना नेता राउत ने कहा, ''पुराने एनडीए और आज के एनडीए के बीच बहुत अंतर है. हमने एनडीए बनाया और उसे मजबूत करने की कोशिश की. हमने ही एनडीए को बचा कर रखा और टूटने नहीं दिया. बीजेपी को भी नहीं छोड़ा. आज गठबंधन से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हो. आप खुद को भगवान समझते हो, यह ठीक नहीं है.''

सेना के नेता ने आगे कहा कि आप किससे पूछकर हमें एनडीए से निकालने की बात करते हो? क्या आपने सीनियर नेताओं से पूछा? राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में जो स्थिति पैदा हुई है वह बीजेपी के अहंकार की वजह से है. राज्य में सरकार गठन के सवाल के जवाब में राउत ने कहा, महाराष्ट्र में सरकार बनेगी और उसका मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा. राज्य की आगामी सरकार स्थिर होगी.

शिवसेना अब विपक्ष में बैठेगी

दरअसल, केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद शिवसेना सांसद अरविंद सावंत को लोकसभा में सामने की तीसरी पंक्ति की सीट आवंटित की गई है. सोमवार से शुरू होने जा रहे सत्र में पार्टी के अन्य 17 सांसदों को नई सीटें आवंटित की गई हैं. आधिकारिक तौर पर यह घोषणा रविवार को की गई. सदन में की गई नई आसन व्यवस्था के अनुसार, शिवसेना अब विपक्ष में बैठेगी.

विपक्ष की कुर्सियां आवंटित

इससे पहले, शनिवार को शिवसेना के राज्यसभा सदस्यों को विपक्ष की कुर्सियां आवंटित की गई थीं. इस तरह तय हो गया कि सोमवार (18 नवंबर) से शुरू होने जा रहे संसद के शीत सत्र में शिवसेना के सांसद अब विपक्ष के साथ बैठेंगे.

लोकसभा में शिवसेना के 18 सांसद

लोकसभा में शिवसेना के 18 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में इसके तीन सदस्य हैं. मानक संसदीय कार्यप्रणाली के अनुसार, शिवसेना सांसद संजय राउत और अनिल देसाई का अब सत्तापक्ष सीटों पर कब्जा नहीं रहेगा.

कांग्रेस-एनसीपी से गठजोड़ की तैयारी

शिवसेना ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद के साथ सत्ता में साझेदारी का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अपनी वर्षों पुरानी सहयोगी भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया है. चुनाव में दोनों पार्टियों ने मिलकर 161 सीटें जीती थीं, मगर सरकार बनाने के लिए और 16 सीटों की जरूरत थी. शिवसेना अब एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर न्यूनतम साझा कार्यक्रम को आगे रखकर सरकार बनाने का प्रयास कर रही है.

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