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विरासत में मिली राजनीतिक सियासत को आगे बढ़ा रहे है ये पुत्र

बड़े चेहरों के इर्द-गिर्द घूमने वाली मौजूदा दौर की राजनीति के तौर-तरीकों और तेवर सब बदल दिये है।

 Sujeet Kumar Gupta |  25 Dec 2019 9:15 AM GMT  |  नई दिल्ली

विरासत में मिली राजनीतिक सियासत को आगे बढ़ा रहे है ये पुत्र
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नई दिल्ली। समय जिस तेज़ी से बदल रहा है, उतनी ही रफ़्तार से देश की सियासत बदल रही है. बड़े चेहरों के इर्द-गिर्द घूमने वाली मौजूदा दौर की राजनीति के तौर-तरीकों और तेवर सब बदल दिये है। एक राष्ट्रीय पार्टीयां चुनाव प्रचार जोरों पर करती है तो वही क्षेत्रीय पार्टीयों से वो मात खा जा रही है। अभी हाल ही में ये झारखंड में देखने को मिला है। जहां पर भाजपा ने कई रैलियां की तो कांग्रेस भी रैलियां करने में पिछे नही रही लेकिन वहा क्षेत्रीय पार्टीय झामुमो सबको मात देते हुए 81 विधानसभी सीटों में 30 सीट अपने नाम कर लिया।

आप को बतादे कि राजनीति सियासत में कुछ ऐसे नेता है जो पिता के बाद बेटे ने सत्ता की कमान संभाली है और उनको आगे बढ़ाने में लगे है।

यूपी: मुलायम-अखिलेश

उत्तर प्रदेश में पिता-पुत्र की जोड़ी मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने में कामयाब रही है. समाजवादी आंदोलन से निकले मुलायम सिंह यादव तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं. मुलायम सिंह पहली बार जनता दल की सरकार में 1989 मुख्यमंत्री बने और इसके बाद 1993 और 2003 में सीएम बने. मुलायम सिंह यादव ने अपनी सियासी विरासत बेटे अखिलेश यादव को सौंपी. अखिलेश यादव 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, लेकिन पांच साल बाद 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में वो अपनी पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं करा सके।



जम्मू-कश्मीर में विरासत की सियासत

विरासत में सियासत का सबसे ज्यादा बोलबाला जम्मू-कश्मीर में देखने को मिला है. अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़ियां जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद पर रह चुकी हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता शेख अब्दुल्ला दो बार मुख्यमंत्री रहे और 1982 में उनके हटने के बाद उनके बेटे फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने. उन्होंने जम्मू-कश्मीर की सत्ता की कमान तीन बार संभाली. फारुख अब्दुल्ला के बाद उनके बेटे उमर अब्दुल्ला भी मुख्यमंत्री बने. ऐसे ही मुफ्ती परिवार भी घाटी की सत्ता पर काबिज रहा है. पीडीपी के अध्यक्ष रहे मुफ्ती मुहम्मद सईद मुख्यमंत्री रहे और उसके बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. 2016 में महबूबा ने भी पिता के निधन के बाद मुख्यमंत्री पद संभाला था।



ओडिशा: बीजू पटनायक- नवीन पटनायक

ओडिशा की सत्ता पर काबिज नवीन पटनायक पांच बार वहां के मुख्यमंत्री रहे हैं. नवीन पटनायक को भी विरासत में राजनीति मिली है. नवीन पटनायक के पिता बीजू पटनायक जनता दल की सरकार में 1990 में ओडिशा के सीएम बने थे और पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था. इसके बाद नवीन पटनायक 2000 में सीएम बने और लगातार सत्ता पर काबिज हैं।



हरियाणा: देवी लाल-ओम प्रकाश चौटाला

हरियाणा में भी राजनीतिक परिवार काफी कामयाब रहे हैं, लेकिन पिता-पुत्र की एक ही जोड़ी सीएम रही है. इसमें चौधरी देवीलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे और उनके निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत ओम प्रकाश चौटाला ने संभाली और सीएम बने. देवीलाल दो बार सीएम रहे तो ओम प्रकाश चौटाला ने 5 बार हरियाणा की सत्ता संभाली है. मौजूदा समय में ओम प्रकाश चौटाला जेल में हैं और उनके पोते दुष्यंत चौटाला हरियाणा के डिप्टी सीएम हैं।



कर्नाटक: देवगौड़ा पिता-पुत्र

कर्नाटक की सत्ता में देवगौड़ा पिता-पुत्र मुख्यमंत्री रहे चुके हैं. एचडी देवगौड़ा 1994 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और इसके बाद वो 1996 में देश के प्रधानमंत्री भी बने. एचडी देवगौड़ा की राजनीतिक विरासत उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी ने संभाली और वो दो बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने, लेकिन एक बार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।



महाराष्ट्र: शंकरराव चव्हाण- अशोक चव्हाण

महाराष्ट्र में चव्हाण परिवार की ओर से पिता के बाद बेटे ने मुख्यमंत्री पद संभाला. कांग्रेस नेता शंकरराव चव्हाण 1975 में पहली बार महाराष्ट्र के सीएम बने थे और दूसरी बार 1986 में सत्ता की कमान संभाली. शंकरराव चव्हाण की राजनीतिक विरासत को उनके बेटे अशोक चव्हाण ने संभाली और दो बार मुख्यमंत्री रहे. हालांकि अशोक चव्हाण कुछ-कुछ समय के लिए ही सीएम रहे हैं।


मेघालय: पीए संगमा-कोनराड संगमा

मेघालय की सियासत में संगमा परिवार का वर्चस्व कायम हैं. इसी का नतीजा है कि मेघालय में संगमा पिता-पुत्र दोनों सीएम बने हैं. मौजूदा समय में कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री हैं. इससे पहले उनके पिता पीएम संगमा 1988 में मुख्यमंत्री बने थे और बाद में वह लोकसभा के स्पीकर भी रहे।



मध्य प्रदेश: रविशंकर शुक्ल-श्यामा चरण शुक्ला

मध्य प्रदेश में भी पिता-पुत्र मुख्यमंत्री रहे चुके हैं. प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बनने का नाम रविशंकर शुक्ला के नाम दर्ज है, उन्होंने 1956 में सत्ता की कमान संभाली थी. पिता की राह पर चलते ही श्यामा चरण शुक्ला ने भी राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस पार्टी में रहते हुए वह दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।



आंध्र प्रदेश: वाईएस राजशेखर रेड्डी-जगन मोहन रेड्डी

आंध्र प्रदेश में भी पिता-पुत्र मुख्यमंत्री रहे हैं. प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे वाईएस राजशेखर रेड्डी 2004 में मुख्यमंत्री बने थे और 2009 में प्लेन क्रैश में उनका निधन हो गया था. राजशेखर रेड्डी की राजनीतिक विरासत उनके बेटे जगन मोहन रेड्डी ने संभाली और मौजूदा समय में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।



अरुणाचल:दोरजी खांडू- पेमा खांडू

अरुणाचल प्रदेश में भी पिता-पुत्र दोनों मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हो चुके हैं. मौजूदा समय में अरुणाचल प्रदेश की सत्ता पर काबिज पेमा खांडू को विरासत में सियासत में मिली है. पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू अरुणाचल के सीएम रह चुके हैं. मौजूदा समय में पेमा खांडू मुख्यमंत्री हैं।



झारखंड: शिबू सोरेन-हेमंत सोरेन

झारखंड में भी पिता के बाद बेटे ने सत्ता की कमान संभाली है. शिबू सोरेन के राजनीतिक वारिस उनके बेटे हेमंत सोरेन बनकर उभरे हैं. शिबू सोरेन के बाद उनके बेटे हेमंत सोरेन भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं. हालांकि यह दोनों लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री पद पर बने नहीं रह सके, शिबू 3 बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे और हेमंत दूसरी बार सीएम बनने जा रहे हैं. इससे पहले हेमंत 17 महीने के लिए सीएम रहे थे।




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