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आखिर कहां हैं राहुल गांधी? महत्वपूर्ण मौकों पर क्यों नजर नहीं आते?

सवाल यह भी है कि जब प्रियंका गांधी सड़क पर संघर्ष कर सकती हैं तो राहुल गांधी क्यों नहीं?

आखिर कहां हैं राहुल गांधी? महत्वपूर्ण मौकों पर क्यों नजर नहीं आते?
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कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके राहुल गांधी देश में रहे या विदेश में यह उनका व्यक्तिगत निर्णय हैं, लेकिन जो लोग सार्वजनिक जीवन में होते हैं उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि देश और संगठन के महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएं। 21 जुलाई को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित का दिल्ली के निगम बोध श्मशान स्थल पर अंतिम संस्कार भी हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, यूपीए की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी तक ने शीला के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाए।

20 जुलाई को निधन के बाद से ही शीला को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है, लेकिन इन सबमें राहुल गांधी नजर नहीं आए। शीला दीक्षित देश की एक मात्र महिला मुख्यमंत्री रहें जो लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री चुनी गईं। इससे शीला दीक्षित की राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगा लेना चाहिए। अंतिम समय में भी शीला दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष थीं। हाल ही में लोकसभा चुनाव भी लड़ा। शीला उन कांग्रेस नेताओं में से थीं, जिन्होंने कभी भी गांधी परिवार के आदेशों की अवेहलना नहीं की।

क्या शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देने के लिए राहुल गांधी को उपस्थित नहीं रहना चाहिए? इतना ही नहीं 19 जुलाई को जब यूपी में प्रियंका गांधी को सोनभद्र जाने से रोका गया तो देश भर के कांग्रेसी सड़कों पर उतर आए, लेकिन राहुल गांधी कहीं भी नजर नहीं आए, जबकि प्रियंका गांधी तो उनकी सगी बहन हैं। सवाल यह भी है कि जब प्रियंका गांधी सड़क पर संघर्ष कर सकती हैं तो राहुल गांधी क्यों नहीं?

लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी भावी प्रधानमंत्री के तौर पर ही प्रचार किया। गरीबों को प्रति वर्ष 72 हजार रुपए देने का वायदा वैसे ही किया जैसे सरकार का मुखिया करता है। यह भी कहा कि मैं जो कहता हंू वो करता हंू। मैंने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में किसानों का कर्जा माफ करने का वायदा किया था वो कांग्रेस सरकार बनते ही कर्जा माफ हो गया। ऐसे राजनेता को संसद सत्र के दौरान देश में नहीं रहना चाहिए?

जब संसद में वार्षिक बजट से लेकर महत्वपूर्ण विधायी कार्य हो रहा है तब राहुल गांधी संसद से नदारत हैं। इतना ही नहीं कर्नाटक में कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार गिर रही है और राज्यों में कांग्रेस के विधायक इस्तीफा देकर दूसरे दलों में शामिल हो रहे हैं। राहुल गांधी का कांग्रेस संगठन में कितना दबदबा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस्तीफा दे दिए जाने के बाद भी नया अध्यक्ष नहीं चुना जा रहा है।

किसी कांग्रेस नेता में इतनी हिम्मतम नहीं कि वह स्वयं को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष माने। इस्तीपफा स्वीकार करने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक तक नहीं बुलाई जा रही है। तकनीकी दृष्टि से तो राहुल गांधी अभी कांग्रेस के अध्यक्ष हैं।

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