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1930 में हिटलर के जर्मनी में जो हुआ, वही अब भारत में हो रहा है कहते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह विधानसभा में रो पड़े

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भावुक हो गए कैप्टन अमरिंदर सिंह

 Shiv Kumar Mishra |  17 Jan 2020 4:45 PM GMT  |  चंडीगढ़

1930 में हिटलर के जर्मनी में जो हुआ, वही अब भारत में हो रहा है कहते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह विधानसभा में रो पड़े

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया है। इसी मौके पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सीएए देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि 1930 के दशक में अडॉल्फ हिटलर ने जो जर्मनी में किया था वैसी ही कार्रवाई अब भारत में हो रही है। सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कैप्टन अमरिंदर ने इस कानून को विभाजनकारी और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी को हादसा करार दिया।

सीएम कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि उनके लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में जो घटनाएं हो रही हैं, वे उनके जीवनकाल में हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, 'आप इस देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बदलना चाहते हैं। जो हो रहा है, वह बेहद दुखद है। हमने भी ऐसा कुछ नहीं सोचा था। हम केवल राजनीति के लिए भाईचारे को तोड़ना चाहते हैं। स्पष्ट है कि इतिहास से हमने कुछ भी नहीं सीखा है।'

पंजाब विधानसभा ने सीएए के खिलाफ पास किया प्रस्ताव

आपको बता दें कि पंजाब विधानसभा ने शुक्रवार को सीएए के खिलाफ ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित किया और केंद्र से इसे वापस लेने की मांग की। इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का काम तब तक रोकने का आग्रह किया है, जब तक कि इससे जुड़े प्रपत्रों या दस्तावेजों को उचित रूप से संशोधित नहीं किया जाता है ताकि इस आशंका को दूर किया जा सके कि यह राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का पहला चरण है और भारत की नागरिकता से एक वर्ग को वंचित करने तथा संशोधित नागरिकता कानून लागू करने के लिए बनाया गया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने भावुक स्वर में कहा, 'गरीब कहां जाएंगे और कहां से वह अपना जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करेंगे, यह एक बड़ा हादसा है। बड़े दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि मेरे जीवनकाल में....काश मैं यहां नहीं होता जब यह सब मेरे देश में हो रहा है। राजनीति के लिए जब भाईचारे को समाप्त किया जा रहा है, ऐसी स्थिति में हम कहां जा रहे हैं?'

'हमें आवाज उठानी है, जिससे हम बाद में अफसोस ना करें'

उन्होंने दावा किया कि 1930 के दशक में हिटलर के जर्मनी में जातीय सफाये के लिए जो किया गया था, अब वही घटनाएं भारत में हो रही हैं। कैप्टन ने जोर देकर कहा, 'जर्मन नागरिकों ने उस वक्त आवाज नहीं उठाई और इसका उन्होंने अफसोस किया लेकिन हमें अब बोलना है ताकि हम बाद में अफसोस नहीं करें।' मुख्यमंत्री ने विपक्ष, विशेष रूप से अकालियों से अपील की कि वे हिटलर की किताब 'मेन कैम्प्फ' (मेरी लड़ाई) पढ़ें ताकि उन्हें सीएए के खतरे समझ आ सकें।

कैप्टन अमरिंदर ने आगे कहा कि वह पंजाबी में इस पुस्तक का अनुवाद कराएंगे और बांटेंगे ताकि सब लोग उसे पढ़ें और हिटलर ने जो गलतियां की थीं, उसे समझें। संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हालिया देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का हवाला देते हुए कैप्टन ने कहा, 'भारत में जो हो रहा है वह देश के लिए ठीक नहीं है।'

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