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चैत्र नवरात्रि शुक्रवार से, देवी कृपा पाना है तो बरतें ये सावधानियाँ

 Special News Coverage |  6 April 2016 8:32 AM GMT

चैत्र नवरात्रि शुक्रवार से, देवी कृपा पाना है तो बरतें ये सावधानियाँ

नई दिल्ली: चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रि की शुरुआत 8 अप्रैल से हो रही है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से गुड़ी पड़वा और हिंदु नवसंवत्सर भी शुरू हो जाएगा। 8 से 15 अप्रैल तक मनाए जाने वाले चैत्र नवरात्रि में प्रतिदिन माता का पूजन वंदन व आराधना का दौर चलेगा। घरों के मंदिरों से लेकर समस्त देवी दरबारों में भक्तों का सैलाब उमड़ेगा।

विशेष योग व संयोग के साथ शुरू होने वाले चैत्र नवरात्र में इस बार मां भवानी डोली पर विराजमान होकर भक्तों के घर आएंगी। वहीं नवमीं के दिन विदाई लेकर वे मुर्गे की सवारी करते हुए अपने धाम जाएंगी। उनके वाहन डोली और मुर्गा सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करने का संकेत दे रहे हैं। इन नवरात्र में नि:स्वार्थ भाव से की गई माता की सेवा परमसुखदायी एवं मनोकामना पूर्ति करने वाली सिद्ध होगी।


हम बड़ी भक्ति और शक्ति के साथ माता के व्रत तो कर लेते हैं लेकिन व्रतों के बीच में कई बार कुछ ऐसे काम भी कर देते हैं जो हमारी भक्ति खराब कर देते हैं, नवरात्र में व्रत के दौरान जहां तक सम्भव हो सुपाच्य भोजन ही लेना चाहिए। अच्छा हो कि कूटू से बने व्यंजनों की तुलना में फलों और सब्जियों का प्रयोग अधिक किया जाये। ऐसे में व्यक्ति को ध्यान रखना चाहिए की उसको क्या करना है और क्या नहीं करना है, तो आइये जानते हैं नवरात्र में व्रत के दौरान बरतें ये सावधानियाँ।

चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा और इसी योग में कलश व घट स्थापना होगी। इस बाद प्रतिपदा तिथि दोपहर 1:27 बजे तक अतिशुभ रहेगी। चैत्र नवरात्रि में प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती के मंत्रों के साथ दूसरे मंत्रों के सम्पुट लगाकर प्रभाव कई गुना बढ़ाया जा सकता है। देवी कृपा प्राप्ति के लिए यह अत्यंत शुभ समय रहेगा। केवल कवच, अर्गला, देवी अथर्वशीर्ष, कुंजिका स्तोत्र का अनुष्ठान तथा नवार्ण मंत्र का जाप माता को प्रसन्न करेगा।

नवरात्र में माता का प्रत्यक्ष पूजन कन्याओं को भोजन कराना, अन्न, धन व वस्त्र आदि का दान करना है। अष्टमी व नवमीं तिथि के दिन किया गया यह पूजन मनोकामना पूर्ति एवं सूनी गोद भरने वाला कहा जाता है। नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में नियमित रूप से मन्त्रों द्वारा पूजा पाठ और व्रत का पालन करें। साथ ही नौ दिन तक देवी दुर्गा माता का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं अखंड ज्योति की सेवा करें। इससे निरोगी काया, स्वास्थ्य लाभ व एकाग्रता के साथ मन की शांति मिलती है।

घर में सुबह शाम माता को दीया जरूर जलाना चाहिए। इससे घर में नकारात्मक शक्तियों का असर खत्म हो जाता है। इन नौ दिनों के व्रत में व्यक्ति को रोज साफ़ वस्त्रों का ही प्रयोग करना चाहिए। नवरात्रों में एक बात का विशेष ध्यान सभी को रखना चाहिए कि यदि आप व्रत कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं लेकिन इन नौ दिनों में हर व्यक्ति को ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए।

नौ रात्रों में घर के अन्दर लहसुन और प्याज प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। नवरात्रों में व्यक्ति को दाढ़ी, नाखून व बाल नहीं कटवाने चाहिए। माता के नौ दिनों की भक्ति वाले दिनों में, मनुष्य को मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

अगर आप इस तरह से अगर चैत्र नवरात्रि में माता का व्रत कर रहे हैं या नहीं किन्तु इन बातों का ध्यान रख रहे है तो आपको देवी की कृपा से लाभ जरुर प्राप्त होगा। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस वर्ष सौम्य नामक संवत्सर होगा, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चतुर्विध की प्राप्ति के लिए इससे अच्छा समय दूसरा नहीं माना जा सकता है।

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