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चाणक्य नीति : ऐसी खूबसूरत महिलाएं विवाह योग्य नहीं होती

 Special News Coverage |  15 Oct 2015 11:22 AM GMT




भारतीय समाज में विवाह महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। शादी सिर्फ दो इंसानों के बीच का संबंध नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। जिस शादी से दो परिवारों की डोर बंधी होती है। शादी के लिए कैसा जीवनसाथी चुना जाए इसके लिए विशेष सावधानी बरतने की अवश्यकता होती है।

बहुत से पुरूष महिलाओं की खूबसूरती के मोहपाश में बंधकर उनसे शादी कर लेते हैं। कुछ समय के उपरांत महिलाओं की खूबसूरती से उनका मोह भंग हो जाता है। सभी खूबसूरत महिलाएं विवाह योग्य नहीं होती। सूरत से अधिक सिरत महत्वपूर्ण होती है।


आचार्य चाणक्य अपनी नीति में बताते हैं की विवाह के लिए कैसी स्त्री का चुनाव करना चाहिए।

चाणक्य कहते हैं -
वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्।
रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले।।


अर्थात - बुद्धिमान और प्रशस्त पुरूष वह है जो ऊंचे कुल, संस्कारी एवं शिष्ट परिवार की कन्या से विवाह करता है। ऐसे परिवार की कन्या देखने में चाहे सुंदर न हो लेकिन अपने सद्गुणों की महक से परिवार की बगीया को महकाती है।

अधिकतर पुरूष महिला के बाहरी अवरण से प्रभावित होकर उन्हें जीवन संगिनी बनाने का निर्णय कर लेते हैं फिर चाहे वह कन्या अधार्मिक और नीच कुल की ही क्यों न हो।

विवाह हमेशा अपने कुल में ही करना चाहिए। अपने से उच्च एवं निम्न कुल की कन्या विवाह उपरांत परिवार में कलह करती हैं। जिससे की परिवार टूट जाता है। उच्च कुल की कन्या को अपने कुल का अभिमान होता है और निम्न कुल की कन्या का स्वभाव व आचरण निम्न ही रहता है।

धार्मिक और आस्तिक विचारों वाली महिला का शिष्ट चाल-ढाल होता है। जो गृहस्थ जीवन को धर्म, अर्थ व काम से सुख-समृद्ध बनाती है।

आचार्य चाणक्य की यह नीति स्त्रियां भी ध्यान रखें, जिन पुरुषों में ऐसे अवगुण हों, उन्हें अपना जीवनसाथी न बनाएं।


कौन थे आचार्य चाणक्य
भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। एक समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए भारतीय सीमा तक आ पहुंचा था, तब चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। चाणक्य ने अपने प्रयासों और अपनी नीतियों के बल पर एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को भारत का सम्राट बनाया जो आगे चलकर चंद्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुए और अखंड भारत का निर्माण किया।

चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) बहुत शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था। उस समय नंदवंश का साम्राज्य था और राजा था धनानंद। कुछ लोग इस राजा का नाम महानंद भी बताते हैं। एक बार महानंद ने भरी सभा में चाणक्य का अपमान किया था और इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए आचार्य ने चंद्रगुप्त को युद्धकला में पारंपत किया। चंद्रगुप्त की मदद से चाणक्य ने मगध पर आक्रमण किया और महानंद को पराजित किया।

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। जो भी व्यक्ति नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।


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