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कल लगेगा सूर्य ग्रहण, जानिए किन राशियों पर पड़ेगा असर और क्या हैं उपाय

 Special News Coverage |  2015-09-12 13:57:39.0

surya grahan




इस वर्ष 2015 का दूसरा सूर्य ग्रहण कल यानि 13 सितंबर, 2015 भ्रादपद आमवस्या के दिन रविवार को ये खंड ग्रास सूर्यग्रहण लगने वाला है, लेकिन भारत में रहने वालों के लिए राहत की खबर ये है कि इसका असर यहां नहीं पड़ेगा। यानी खंड ग्रास सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ये सूर्य ग्रहण दक्षिण ध्रुव, मेडागास्कर, जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, बोत्सवाना एवं हिन्द महासागर के दक्षिणी भागों में दिखाई देगा। पहला सूर्य ग्रहण 20 मार्च को लगा था वो भी भारत में नहीं दिखा था।


यह ग्रहण विश्व के समय के अनुसार 10:12 पर आरंभ होगा। भले ही यह भारत में नहीं दिखाई दे, लेकिन इसका असर जरूर होगा। आम तौर पर लगने वाले सूर्य ग्रहण की तरह यह अर्ध सूर्य ग्रहण भी ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत आने वाली कुल 12 राशियों पर असर दिखाएगा।



13 सितंबर के ग्रहण का समय एवं प्रभाव

ग्रहण आरंभ-प्रात:- 10:12 बजे
ग्रहण मध्य-दोपहर - 12:24 बजे
ग्रहण मोक्ष-दोपहर- 03:36 बजे
ग्रहण का सूतक- सूर्योदय से लेकर ग्रहण मोक्ष तक।

यह ग्रहण वृष, मिथुन, तुला एवं मकर, राशि के लिए उत्तम तथा कर्क, कन्या, वृश्चिक व कुंभ वालों के लिए मध्यम रहेगा। मेष, सिंह,धनु एवं मीन राशि के लिए बहुत अच्छा नहीं रहेगा।

परन्तु जिन राशियों पर इसका अधिक प्रभाव नहीं है, उन्हें भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। क्योंकि सूर्य ग्रहण के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए आपको वह सभी उपाय करने चाहिए जो कि सूर्य ग्रहण या फिर चंद्र ग्रहण के दौरान ज़रूरी हैं।

गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान देने की जरुरत
इसलिए ज्योतिष विशेषज्ञों द्वारा गर्भवती महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही सभी द्वारा यथाशक्ति जाप, पाठ व दानादि करने को कहा गया है ताकि ग्रहण का अशुभ प्रभाव क्षीण किया जा सके।

ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप, उपासना करनी चाहिए
ग्रहण काल आरम्भ होने से समाप्ति के मध्य की अवधि में ज्योतिषीय उपायों के अनुसार पाठ-पूजा करने की सलाह दी जाती है। मंत्र जाप, उपासना, पाठ, हवन, मानसिक जाप, चिन्तन, आदि इस दौरान बेहद कल्याणकारी माने जाते हैं।

इस बात का ध्यान रखें कि सूर्य ग्रहण अवधि में देव मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता है। निर्देशानुसार सूतक समय के बाद स्वयं भी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, तथा देवमूर्तियों को स्नान करा कर, गंगाजल छिड़क कर, नवीन वस्त्र पहनाकर, देवों का श्रृंगार करना चाहिए।

इन्हे स्पर्श ना करें
देव प्रतिमाओं के अलावा तुलसी वृक्ष, शमी वृक्ष को स्पर्श नहीं किया जाता है। यह दोनों वृक्ष ही शास्त्रों में देवी-देवता की पद्धति के समान ही हैं, इसलिए ग्रहण के दौरान इन्हें स्पर्श कर इनकी पवित्रता को खण्डित नहीं करना चाहिए।



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जिस तरह से ग्रहण के बाद देवी-देवताओं की मूर्ति पर गंगाजल छिड़कने की रीति है ठीक इसी प्रकार इन पवित्र वृक्षों पर भी गंगाजल छिड़क कर शुद्धि अवश्य करें।

ग्रहण क्या करना चाहिये
ग्रहण काल में अपने इष्ट देव, मंत्र, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र आदि का जप दीपक जला कर करना चाहिए। मंत्रों की सिद्धि के लिए यह समय सर्वथा शुभ होता है। यदि आपको ग्रहण संबंधित कोई मंत्र प्राप्त ना हो रहा हो तो आप महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं, जो कि इस प्रकार है ---
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनं, उर्वारुक्मिव बंधनात्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्”

इसके अलावा आप गायत्री मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। यह जाप इतना आसान है कि इसे बड़े से लेकर बच्चे भी कर सकते हैं लेकिन यह मन्त्र जप महिलाओं के लिए निषेध है। गायत्री मंत्र इस प्रकार है ---
“ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्”

यकीनन ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप फलदायी होता है। लेकिन आपको इन दिशा निर्देशों के साथ अन्य कुछ बातों का भी ध्यान रखना है जैसे कि, इस दौरान भोजन करना, भोजन पकाना, शयन, मल-मूत्र, आदि वर्जित माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पहले से पका हुआ या उसी समय पकाया जा रहा भोजन अशुद्ध हो जाता है। इसलिए इसे भूलकर भी ग्रहण ना करें।


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