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ये मंदिर साल में सिर्फ 5 घंटे के लिए खुलती है, बलि दी जाती है हजारों बकरों की

 Special News Coverage |  8 April 2016 2:49 PM GMT

ये मंदिर साल में सिर्फ 5 घंटे के लिए खुलती है, बलि दी जाती है हजारों बकरों की

गरियाबंद: रायपुर के गरियाबंद जिले में स्थित निरई माता मंदिर साल में सिर्फ 5 घंटे के लिए खुलता है। इस दिन यहां हजारों बकरों की बलि दी जाती है। यहाँ की मान्यता है बलि चढ़ाने से देवी मां प्रसन्न होती है और सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। वहाँ पर कई लोग मन्नत पूरी होने के बाद भेंट के रूप में जानवरों की बलि देते हैं। और आपको बता दू यहां का प्रसाद महिलाएं नहीं खाती है।

निरई माता मंदिर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर अंचल के देवी भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है। यहां जानवरों खासकर बकरे की बलि की प्रथा आज भी जारी है।


इस मंदिर में महिलाओं को प्रवेश और पूजा-पाठ की इजाजत नहीं हैं, यहां केवल पुरुष पूजा-पाठ की रीतियों को निभाते हैं। महिलाओं के लिए इस मंदिर का प्रसाद खाना भी वर्जित है, खा लेने पर कुछ न कुछ अनहोनी हो जाती है।

इस मंदिर के पट साल में केवल एक दिन चैत्र नवरात्रि के पहले रविवार को खुलते हैं। देश के अन्य मंदिरों में जहां दिन भर मातारानी के दर्शन होते हैं वहीं यहां सुबह 4 बजे से सुबह 9 बजे तक यानि केवल 5 घंटे ही माता के दर्शन किए जा सकते हैं। इस दिन हजारों की संख्या में भक्त निरई माता के दर्शन के लिए गरियाबंद पहुंचते हैं। इस साल मंदिर के पट 10 अप्रैल को खुलेंगे।

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