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शेयर बाजार में मचा हाहाकार, दो दिन में शेयर बाजार में निवेशकों को 5 लाख करोड़ की चपत

सोमवार दोपहर कारोबार के आखिरी घंटों में सेंसेक्‍स 850 अंको से ज्याद टूट गया तो वहीं निफ्टी में 280 अंक तक की गिरावट देखने को मिली।

 Special Coverage News |  8 July 2019 11:26 AM GMT  |  दिल्ली

शेयर बाजार में मचा हाहाकार, दो दिन में शेयर बाजार में निवेशकों को 5 लाख करोड़ की चपत
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नई दिल्ली : मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट के बाद शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को शेयर बाजार में हुई बड़ी गिरावट के बाद आज सोमवार को भी शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट से हलचल मची हुई है।

सोमवार दोपहर कारोबार के आखिरी घंटों में सेंसेक्‍स 850 अंको से ज्याद टूट गया तो वहीं निफ्टी में 280 अंक तक की गिरावट देखने को मिली। इस दौरान सेंसेक्‍स 38,660 के स्‍तर पर पहुंच गया जबकि निफ्टी लुढ़क कर 11 हजार 500 पर आ गया। यह इस साल इंट्रा डे की सबसे बड़ी गिरावट है।

ऑटो सेक्‍टर बड़ी गिरावट

मोदी 2.0 की पहली बजट पेश होने के बाद सबसे ज्यादा गिरावट शेयर मार्केट के ऑटो सेक्‍टर में देखने को मिली। दरअसल ऑटो सेक्‍टर के शेयर पिछले तीन साल के सबसे निचले स्तर पर देखने को मिली। मारुति और हीरो मोटोकॉर्प में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही, तो वहीं बजाज आटो, यस बैंक, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और ओएनजीसी सभी 2 फीसदी के करीब गिरावट दिखी।

निवेशकों के दो दिन में डूबे 5 लाख करोड़

नई सरकार की पहली बजट पेश होने के बाद से ही शेयर मार्केट में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। शुक्रवार के शेयर बाजार में हुई गिरावट के बाद सोमवार को भी यह सिलसिला जारी रहा। जिस बजह से निवेशकों के दो दिनों में 5 लाख करोड़ से अधिक डूब गए हैं। दरअसल शुक्रवार को बीएसई लिस्‍टेड कंपनियों की मार्केट 53.58 लाख करोड़ थी जो सोमवार को घटकर 148.43 लाख करोड़ पर आ गई।

क्‍या है मुख्य वजह

मोदी 2.0 सरकार की पहली बजट निवेशकों को रास नहीं आई। जिस बजह से शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बाजार के जानकारों का कहना है कि आम बजट 2019 ( buget 2019) में घरेलू अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर सरकार ने स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं की है। यही वजह है कि निवेशक काफी निराश हैं।

इसके अलावा अमेरिका (america) में जून महीने में जॉब डाटा मजबूत आने से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की संभावना कम होने से एशिया बाजारों में नकरात्मक रुझान रहा। जिस बजह से रूपये में कमजोरी देखी गई, इस कारण से भी निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।

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