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अब फौगाट सिस्टर्स भी पेशेवर खिलाड़ी के रूप में होना चाहती हैं शामिल

 Special News Coverage |  23 Oct 2015 12:49 PM GMT

phogat sisters

चरखी दादरी (प्रदीप साहू) : ओलंपिक खेलों के मुक्केबाजी मुकाबलों में भारत को पहली बार पदक दिलाने वाले विजेन्द्र सिंह अपने पेशेवर कैरियर के पहले पायदान सफलतापूर्वक चढ़ गए हैं। बिजेंद्र बाक्सर द्वारा पैशेवर खिलाड़ी के तौर पर जाने के बाद अब हरियाणा की गीता व बबीता फौगाट भी पेशेवर खिलाड़ी के रूप में शामिल होना चाहती हैं। हालांकि वे देश में ही रहकर पेशेवर खेल भी खेलेंगी और भविष्य में होने वाले ओलम्पिक में क्वालीफाई के लिए भी संघर्ष करेंगी।


दोनों बहनों ने यह खुलासा चरखी दादरी में एक निजी समारोह में शामिल होने के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए किया। उनके साथ आए पूर्व बाक्सर दोर्णाचार्य व भीम अवार्डी राजकुमार सांगवान ने भी पेशेवर खेल को समर्थन करते हुए खिलाडिय़ों को देश-प्रदेश का ख्याल रखने की भी नसीहत दी है।

चरखी दादरी में आयोजित पतांजलि शोरूम के उद्घाटन समारोह में आज पूर्व बाक्सर दोर्णाचार्य व भीम अवार्डी राजकुमार सांगवान, भीम अवार्डी व महिला विश्व कुश्ती विजेता गीता फौगाट व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बबीता फौगाट पहुंचे। यहां उद्घाटन समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जहां गीता व बबीता फौगाट ने पेशेवर व लीग खेलों में खेलने की मंशा जाहिर की।

वहीं दोनों बहनें देश व प्रदेश के लिए नियमों को ताक पर रखकर पेशेवर नहीं बनना चाहती हैं। दोनों बहनें देश में होने वाले लीग मैचों के माध्यम से जहां पैसा व अभ्यास का समय निकालने की बात स्वीकार करती हैं वहीं भविष्य में होने वाले ओलम्पिक में देश के लिए सोना जीतने के लिए नियमोंनुसार आगे बढऩे की बात का समर्थन कर रही हैं।

कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व बाक्सर दोर्णाचार्य व भीम अवार्डी राजकुमार सांगवान का कहना है कि पेशवर मुक्केबाजी में पैर जमाना आसान नहीं है। लेकिन बिजेंद्र ने पेशेवर बनकर और पहला मैच जीतकर साबित कर दिया है कि वह कुछ कर सकने में सक्षम है।

सांगवान बताते हैं कि बिजेंद्र को अभी पेशेवर नहीं बनना था। देश को मुक्केबाजी दल से काफी उम्मीद है। ओलम्पिक की तैयारी में जुटे युवा मुक्केबाजों के लिए विजेन्द्र प्रेरणा का स्रोत था, ऐसे में उसका निर्णय सहीं नहीं है। इससे साफ जाहिर होता है कि खेलों की दुनिया कितनी तेजी से बदल रही है। इससे चोटी पर बैठे खिलाडिय़ों की सोच का संकेत भी मिलता है।


क्या कहना है गीता फौगाट का -
गीता फौगाट कहती हैं कि उसे हरियाणा सरकार द्वारा डीएसपी का पद न देने की टीस मन में है और इसी टीस को दूर करने के लिए हरियाणा पुलिस खेल अकादमी के माध्यम से उन्होंने हरियाणा सरकार से पत्र व्यवहार भी किया है। गीता मानती हैं कि वह डीएसपी पद पाने की शुरू से ही हकदार रही हैं। लेकिन पता नहीं क्यों उसे डीएसपी के पद पर नियुक्ति किया जाता?

गीता का कहना है कि वह पेशेवर व लीग मैचों में जाना पसंद करती हैं और भविष्य में देश के अंदर होने वाले पेशेवर लीग मैचों में हिस्सा लेंगी। साथ ही यह भी कहती हैं कि वह 2016 में होने वाले ओलम्पिक में देश के लिए पदक जीतने के लिए संघर्ष व अभ्यास कर रही हैं और लीग मैचों के माध्यम से पैसा भी मिलेगा व अभ्यास भी हो जाएगा।

बहन गीता फौगाट के कदमों पर आगे बढ़ते हुए बबीता फौगाट भी अब पेशेवर व लीग मैचों में जाना चाहती हैं। बबीता बताती है कि वे पेशेवर व लीग मैच से अपना अभ्यास अच्छी तरह से कर पाएगी। इसके साथ-साथ वह अपनी बड़ी बहन गीता के दांव-पेंचों को भी नजदीक से देखते हुए भविष्य में मैडल जीतने के लिए संघर्ष करेगी।

गीता व बबीता में में प्रतिभा तो है ही, खुदा के फज़ल से शक्ल-सूरत भी खासी अच्छी पाई है। इसीलिए दोनों बहनों ने ओलम्पिक व अन्य अंतर्राष्ट्रीय खेलों में झंडा गाडऩे के बाद रातों-रात वह ग्लैमर की दुनिया का चमकता सितारा बन गई थी। दोनों बहनों को अब अमीर खान की फिल्म में भी काम करने का मौका मिल चुका है। पैसे की चमक और शोहरत की धमक से वह अनजान नहीं है। सयानी बहनें है, इसी कारण वे सरकार व खेल निदेशालय से मिलकर व नियमोनुसार पेशवर व लीग मैच के साथ-साथ पैसा कमाने का भी निर्णय कर लिया है। कयास हैं कि दोनों बहनों द्वारा पेशेवर व लीग मैचों में करोड़ों रुपये मिलेंगे, जिससे उनकी बाकी जिन्दगी अच्छी कट जाएगी। आज सभी नामी खिलाड़ी देश का नाम रोशन करने के साथ-साथ अपना भविष्य भी सुरक्षित करना चाहते हैं।

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