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200 पन्नों की रिपोर्ट में, JNU को बताया सेक्स रैकेट का गढ़

 Special News Coverage |  28 April 2016 7:11 AM GMT

200 पन्नों की रिपोर्ट में, JNU को बताया सेक्स रैकेट का गढ़

नई दिल्ली: JNU में देश विरोधी नारेबाजी के बाद 200 पेज के एक डॉक्युमेंट में JNU को 'ऑर्गनाइज्ड सेक्स रैकेट' का गढ़ बताया गया है। खास बात यह है कि 2015 में जेएनयू के ही 11 प्रोफसर्स ने यह डॉजियर तैयार किया था। इस रिपोर्ट को JNU एडमिनिस्ट्रेशन को भी सौंपा गया है।

रिपाेर्ट्स के मुताबिक, जेएनयू की यह रिपोर्ट तैयार करने वाले प्रोफसर्स के ग्रुप को अमिता सिंह लीड कर रहीं थीं। वे सेंटर फॉर लॉ एंड गवर्नेंस में प्रोफेसर हैं। अमिता सिंह का दावा है कि JNU हॉस्टल के मेसों में सेक्स वर्कर्स का काम करना एक आम बात है। डॉक्युमेंट के फॉर्मेट में तैयार की गई इस रिपोर्ट का टाइटल 'जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी: द डेन ऑफ सेशेनिज्म (अलगाववाद) एंड टेररिज्म (आतंकवाद)' है। रिपोर्ट में JNU के कुछ टीचर्स पर सेपरेटिस्ट मूवमेंट को बढ़ावा देने, स्टूडेंट्स को मिसगाइड करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इस बात का जिक्र है कि JNU हॉस्टल में शराब पीने से लेकर अनैतिक गतिविधियां करने जैसे मामलों में 1000 से ज्यादा स्टूडेंट्स पर 2000 से लेकर 5000 रुपए तक का फाइन भी किया जा चुका है। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं।


हॉस्टल के गेट्स के बाहर कभी भी सैकड़ों शराब की खाली बोतलें देखी जा सकती हैं। रिपोर्ट को लेकर अमिता सिंह को कोट किया गया है। जिनका कहना है, ''खुलेआम सेक्स वर्कर्स को हॉस्टल के मेस में नौकरी दी जाती है, जहां वो न सिर्फ जेएनयू के लड़कों के साथ गलत काम करती हैं बल्कि लड़कियों को भी अपने रैकेट में शामिल होने के लिए उकसाती हैं।'' रिपोर्ट के मुताबिक रात में अक्सर हॉस्टल के आसपास महंगी और बड़ी-बड़ी कारें घूमते हुए देखी जाती हैं। कुछ सिक्युरिटी गार्ड भी इस रैकेट से जुड़े हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रेशर्स को इस ग्रुप (रिंग) में शामिल करने के लिए मनी, ड्रग्स, सेक्स और शराब को टूल्स की तरह यूज किया जाता है। 11 प्रोफसरों की इस रिपोर्ट को अमिता सिंह ने ही JNU एडमिनिस्ट्रेशन में सबमिट की थी। स्पेशल सेंटर फॉर संस्कृत स्टडी के असिस्टेंड प्रोफेसर हरिराम मिश्रा, इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले लोगों में शामिल रहे हैं। उनका कहना है कि JNU को ऐसी हरकतों से बचाने और एक सेफगार्ड मुहैया कराने के लिए इस रिपोर्ट को तैयार किया गया था।

जेएनयू एक ऐसी जगह बन गया है जहां फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर कम्युनिस्ट दूसरों को आतंकित करते हैं। हमारा प्वाइंट ये है कि स्टूडेंट्स को गैरराजनीतिक होना चाहिए। पॉलिटिक्स के लिए कैंपस के बाहर बहुत जगह है। लेकिन JNU स्टूडेंट यूनियन को कैंपस के कामों तक ही लिमिटेड होना चाहिए। लेकिन अनफॉर्चुनेटिली, ऐसा नहीं हो रहा है।

JNU में हुई कथित एंटी नेशनल एक्टिविटीज की जांच करने को लेकर एक हाई लेवल कमिटी बनाई गई है। इस बीच 2015 में तैयार की गई यह रिपोर्ट सामने आई है। इसलिए इसे काफी अहम माना जा रहा है। JNU एडमिनिस्ट्रेशन ने एंटी नेशनल एक्टिविटीज को लेकर रिसर्च स्कॉलर उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को सस्पेंड किया है। इसके अलावा स्टूडेंट लीडर कन्हैया कुमार पर 10 हजार का जुर्माना लगाया गया है।

इन लोगों पर JNU कैंपस में पार्लियामेंट अटैक के दोषी अफजल गुरु के समर्थन में 19 फरवरी को कैंपस में एक प्रोग्राम ऑर्गनाइज करने और देश विरोधी नारेबाजी का आरोप है। खास बात यह है कि एबीवीपी के लीडर सौरभ शर्मा जिन्होंने कन्हैया कुमार के खिलाफ कंपलेंट रजिस्टर्ड कराई थी उसपर भी 10 हजार का जुर्माना लगाया गया है।

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