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सरहद पार कर रोज नेपाल जा रहे 25 हजार शराबी

 Special News Coverage |  23 April 2016 2:28 PM GMT

सरहद पार कर रोज नेपाल जा रहे 25 हजार शराबी

पटना: बिहार के छह जिलों से तकरीबन 25 हजार शराबी शराब पीने के लिए रोज नेपाल पहुंच रहे हैं। इसको लेकर खुफिया विभाग ने राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी है। वही इस मुद्दे भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच बैठक की जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराब पर पाबन्दी लगा दी जिसने शराबियों का जीना मुहाल कर दिया है। शराब न मिलने से कुछ लोग इतने परेशान हो चुके हैं कि उन्हें अब नेपाल का रुख करना पड़ रहा है। सीमावर्ती इलाकों के लोग नेपाल से आधे घंटे में शराब पीकर बिहार सीमा में लौट आते हैं।


पूर्ण शराबबंदी के बाद भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नेपाल का मलंगवा शहर गुलजार हो गया है। शाम ढलते ही यहां मेला जैसा दृश्य बन जाता है। मुंहमांगा पैसा देकर लोग शराब खरीद रहे हैं। बॉर्डर पर रोज पहुंच रही शराब की बड़ी खेप से जिला प्रशासन की नींद उड़ गई है। बिहार के छह जिलों से तकरीबन 25 हजार पियक्कड़ शराब पीने के लिए नेपाल पहुंच रहे हैं। इस संबंध में खुफिया विभाग ने राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी है।

रिपोर्ट के अनुसार, बसों व सीमा के रास्ते बिहार के सीतामढ़ी, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, किशनगंज व सुपौल में शराब की बड़ी खेप पहुंच रही है। शराब के अवैध कारोबार में अब महिलाओं को लगाया गया है। महिलाएं बोरा में पत्ता कसकर और उसके बीच में शराब की बाेतल रखकर सीमा क्षेत्र में ला रही हैं। इस पार ग्राहक पहले से तैयार होते हैं। बोरे से निकालकर उन ग्राहकों को बोतल दे दिया जाता है।

बिहार के जोगबनी जिले से लोग नेपाल के बिराटनगर जिले तक पहुंच रहे हैं। सशस्‍त्र सीमा बल के सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक नेपाल स्थित इंटरनेशनल बॉर्डर पर छोटी झोपड़‍ियां बना ली गई हैं और इनमें अचानक इजाफा हुआ है। नेपाल और भारत के बीच स्थित सीमा पर किसी को भी वीजा की जरूरत नहीं होती है।

इसे रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत है। एसएसबी ने भी नेपाल की खुली सीमा से विगत 21 दिनों से खासकर शाम को पियक्कड़ों की आवाजाही की पुष्टि की है। इससे पूर्ण शराबबंदी को सफल बनाने में जुटे अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने पड़ोसी देश नेपाल से सहयोग की मांग की है।
दो देश और दो कानून के कारण नेपाल सरकार पियक्कड़ों पर कार्रवाई से इनकार कर रही है।

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