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भारत माता की जय बोलने पर फतवा जारी

 Special News Coverage |  1 April 2016 1:29 PM GMT

भारत माता की जय बोलने पर फतवा जारी
नई दिल्ली : दारुल उलूम ने भारत माता की जय बोलने पर फतवा जारी कर इसे इस्लाम के खिलाफ बताया है। दारुल उलूम ने कहा कि जिस तरह वंदे मातरम नहीं बोल सकते उसी तरह भारत माता की जय भी नहीं बोल सकते। यूपी के सहारनपुर में दारुल उलूम इस्लामिक शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र है। बीजेपी ने इसे देश का अपमान बताया है। सवाल ये है कि भारत माता की जय बोलने में हर्ज क्या है?

बीजेपी का विरोध दारुल उलूम देवबंद के उस फतवे के बाद आया है जिसमें भारत माता की जय बोलने को इस्लाम के खिलाफ बताया गया है। दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी करते हुए कहा है कि भारत हमारा वतन है और हमारे पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं। हम औरों की तरह ही मुल्क से प्यार और मोहब्बत करते हैं, लेकिन वतन को अपना भगवान नहीं मान सकते, यानी कि मुल्क की पूजा नहीं कर सकते। मुसलमान खुदा में यकीन रखता है और खुदा के सिवा किसी दूसरे की पूजा नहीं कर सकता। जबकि, इस नारे में हिंदुस्तान को देवी की तरह समझा गया है, जो कि इस्लाम मजहब को मानने वालों के लिए अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करने जैसा है।


भारत माता की जय बोलने को लेकर पूछे जा रहे सवालों पर दो दिन पहले आठ मुफ्तियों ने मिलकर चर्चा की और फिर ये फतवा जारी किया। देवबंद से निकली बात का मुस्लिम समाज में बड़ा सम्मान है। माना जाता है कि अगर देवबंद ने कोई बात कही है तो पूरे मुस्लिम समाज की यही राय है।

पूरा विवाद पिछले महीने 3 मार्च को तब शुरू हुआ था जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि नौजवानों को भारत माता की जय कहना सिखाना होगा। भागवत के इस बयान का एमआईएम प्रमुख ओवैसी ने इन शब्दों में विरोध किया था।

राज्यसभा सांसद जावेद अख्तर ने पिछले महीने राज्यसभा में भारत माता की जय के नारे लगाकर ओवैसी की निंदा की थी। पाकिस्तान के धर्म गुरु मौलाना ताहिर उल कादरी ने कहा कि इस्लाम में वतन का जय जयकार करना गुनाह नहीं है।

सरकार में ही भारत माता की जय पर जंग की शुरुआत हो गई। शिवसेना ने जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री बनने जा रहीं पीडीपी की महबूबा मुफ्ती को भारत माता की जय का नारा लगाने को कहा। जिसके बाद मोहन भागवत को कहना पड़ा कि भारत माता की जय बोलने के लिए किसी पर भी दबाव बनाने की जरूरत नहीं। और अब मुस्लिमों के बड़े शिक्षण संस्थानों में से एक दारुल उलूम देवबंद ने नहीं बोलने का फतवा जारी करके इस विवाद को नए सिरे से बढ़ा दिया है।

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