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हिन्दू आस्था के सम्मान के साथ कामन सिविल कोड संभव कैसे हैं : इमरोज़ खां

 Special News Coverage |  21 Oct 2015 9:55 AM GMT

Astha

देश में अल्पसंख्यक समुदाय पे ज़बरदस्त दवाब बनाने की कोशिश हर स्तर पे ज़ारी है अगर मौजूदा हालात पे गौर किया जाए तो एक तरफ देश में गौ हत्या के नाम एक के बाद एक तीन मुस्लिम को अफवाह के नाम पे मार दिया गया और एक बड़ा तबका इन वारदातों को सामान्य बताने की कोशिश में दिन रात एक किये हुए है। एक तरह से राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ ने अभियान छेड़ रखा है। कि गाय हिन्दू धर्म की मान्यताओ के आधार पे माँ के समान है और गाय मूत्र से लेकर गाय के गोबार आदि में कैंसर से लेकर एटम बम को विफल करने की क्षमता है।




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देश में हिन्दू धर्म की जनसँख्या ७९% है इसलिए गौवध पे रोक लगाने के लिए कानुन को किसी प्रकार अनुचित नही कहा जा सकता है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र सभी धर्मो की आस्थाओ के सम्मान के साथ हो तो ऐसी सोच महात्मा गाँधी की भी थी लेकिन अपनी धार्मिक मान्यताओ के साथ दुसरे धर्म की मान्यताओ की वैधता समाप्त करना एक दोगली नीति है। एक तरफ एक धर्म की आस्था के लिए कानुनी आवरण और दुसरे धर्म की मान्यताओ के कानुनी वैधता की समाप्ति। इतना ही नही हिन्दू धर्म के संरक्षण के लिए दलित के हिन्दू धर्म से अलग होते ही आरक्षण को समाप्त कर देने की संवैधानिक मान्यता है। अगर दलित अपना धर्म परिवर्तित करके इसाई या मुस्लिम धर्म अपना ले तो दलित क्या दलित नही रहता है। अगर देखा जाए तो ऐसे कानुन परोक्ष रूप से हिन्दू धर्म के लिए वरदान से कम नही है। लेकिन इतने सब कानूनों को अपने लिए रखने वाले उसी धार्मिक समूह के बड़े वर्ग को अल्पसंख्यक के लिए ऐसे कानुन से एलर्जी आश्चर्य से कम नही।


अगर कॉमन सिविल कोड में मुख्यता मुस्लिम मान्यताओ जैसे वैवाहिक पदति यानी निकाहनामा और तलाक आदि की कानुनी वैधता समाप्त करने के साथ बहुविवाह आदि पे संविधान में संशोधन करके थोपने की कोशिश है। एक वर्ग विशेष जो अपनी धार्मिक आस्था के लिए मरने मारने पे तुला है। वही वर्ग मुस्लिम को धर्मनिरपेक्ष होकर रहने की नसीयत दे रहा है। और पुछ रहा है मुसलमानों को पर्सनल ला रखने की आज़ादी क्यों है ? मीडिया भी इस वर्ग की बात दूर दूर तक पहुचाने में वो भी उन्ही के अनुसार पूरी तरह मुस्तैद है। जिस देश में एक समुदाय को अपनी आस्था के लिए आप खाने से रोक रहे है उसी देश में खाने से रोकने वाले उसी समुदाय की आपसी कानूनों को चुनौती देने के लिए तत्पर है।
आखिर ये किस प्रकार का कॉमन सिविल कोड है !


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