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जामा मस्जिद के इमाम के बेटे करेंगे हिन्दू लड़की से निकाह

 Special News Coverage |  1 Oct 2015 1:33 PM GMT



नई दिल्ली : जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी के उत्तराधिकारी 20 वर्षीय शाबान बुखारी हिंदू युवती को शरीक-ए-हयात बनाने जा रहे हैं। निकाह के लिए हिन्दू युवती ने इस्लाम कुबूल कर लिया है। स्नातक के छात्र रहे शाबान को पिछले वर्ष नवंबर में पुरानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में भव्य समारोह में इमाम सैयद अहमद बुखारी ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।

सूत्रों के मुताबिक ढाई साल से चल रहे अफेयर को निकाह में बदलने को लेकर दोनों परिवारों में काफी जद्दोजहद चली। जिस युवती से शाबान बुखारी के निकाह की बात सामने आ रही है, वह दिल्ली की ही बताई जा रही हैं। बुखारी परिवार का हिस्सा बनने के लिए उन्होंने इस्लाम कुबूल कर लिया है। कुरान याद कर रही हैं।


सूत्र बताते हैं कि सब कुछ तय हो चुका है। शाबान के निकाह के लिए 13 नवंबर की तारीख मुकर्रर की गई है। दावत-ए-वलीमा 15 नवंबर को होगा। बताया जा रहा है कि निकाह और दावत-ए-वलीमा में चुनिंदा लोग ही शामिल होंगे। कार्ड बांटे जा रहे हैं। आयोजन के लिए महिपालपुर में एक समारोह स्थल की बुकिंग की बात भी सामने आई है।

क्या कहना है इमाम का
जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि 'हम किसी भी मामले में कोई गैर शरई काम नहीं कर सकते। जिस लड़की से मेरे बेटे की शादी होने वाली है, वह कुरान हिफ्ज कर रही है। वह नमाज रोजे की पाबंद है। यूपी में पंचायत चुनाव होने वाले हैं, इसलिए मुझे बदनाम करने के लिए इस तरह की अफवाह फैलाई जा रही है। हमें यह भी मालूम हो गया है कि यह बात किसके इशारे पर कही गई है।'



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इस पूरे मामले पर सैयद अहमद बुखारी के भाई याहया बुखारी ने कहा कि उनका उस घर से कोई ताल्लुक नहीं है और न ही आगे होगा।

दोनों राम जन्म भूमि या सोमनाथ या दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में विवाह करें: मौलाना असलम जावेद कासमी
ऑल इंडिया मजलिस उलेमा के रामपुर के जिलाध्यक्ष मौलाना असलम जावेद कासमी ने मंगलवार को मीडिया को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि शाही इमाम के बेटे की शादी हिंदू परिवार की लड़की से तय हुई है। इस अच्छे फैसले का हम स्वागत करते हैं और आग्रह करते हैं कि हिंदू बच्ची को जबरन मुस्लिम न बनाएं, बल्कि अपने बेटे को हिंदू धर्म में शामिल करते हुए हिंदू रस्म-रिवाज से दोनों का विवाह करें। यह काम सोमनाथ मंदिर या राम जन्म भूमि में हो सकता है। दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर भी अच्छा स्थान रहेगा।

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