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बीएस बस्सी पुलिस कमिश्नरः कन्हैया की जमानत का विरोध नहीं करेंगे'...आखिर क्यों?

 Special News Coverage |  21 Feb 2016 11:40 AM GMT

kanhaiya बीएस बस्सी पुलिस कमिश्नरः कन्हैया की जमानत का विरोध नहीं करेंगे'...आखिर क्यों?
यूपी सरकार से गुस्सा में आकर समय से पहले रिटायर्मेंट लेकर जनता की आवाज उठाने बाले पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्यप्रताप सिंह ने आज jnu कांड पर अपनी वाल पर इस तरह लिखा।

सूर्यप्रताप की वाल से

बेगुसराय के 'बेहट' गाँव का 'कन्हैया' गद्दार हो गया...देशद्रोही हो गया.. 'सरकारी-गुनहगार' हो गया...
......कौन कहता है ये ?....बिना सबूत के दिल्ली के वाचाल पुलिस कमिश्नर 'बस्सी' कहता है ... राजनैतिक तपेदिक के शिकार कुछ टीवी चैनेल कह रहे हैं.......... और राष्ट्रभक्ति के 'ठेकेदार' नेता और उनके उपद्रवी चमचे कह रहे हैं.... 'कन्हैया' को जेल में अंडरवर्ल्ड डॉन 'छोटा राजन' की बगल में रखा गया है ......
बिहार के बेगुसराय के 'बेहट' गाँव में 'कन्हैया' का परिवार अत्यन्त गरीबी व मुफ़लिसी की जिन्दगी जीता है ...वहां जब पत्रकारों व टीवी चनेलों का जमघट लगा, तो उस परिवार के पास बैठाने के लिए टूटी चारपाई के सिवाय कुछ भी नहीं था ...चाय पिलाने की बात तो दूर ....
जे.एन.यू. में जो भी कुछ हुआ और आगे हो रहा है, वह देश के लिए अच्छा नहीं ...वंहा कुछ लोगो ने देश विरोधी नारे लगाये गए ...कोई भी भारत का नागरिक उसे उचित नहीं कह सकता ...पुलिस उन तत्वों को पहचान कर कठोर 'उचित' कार्यवाही करे...इस में कोई दो राय नहीं हो सकती ... साथ ही 'देश भक्ति' व 'राष्ट्रवाद' किसी विशेष राजनैतिक जमात या विचारधारा का एकाधिकार है, यह भी एक मिथक है ... भक्ति' व 'राष्ट्रवाद', देश के हर नागरिक को प्रिय है और होना भी चाहिए ...'भारत माता की जय'...'बंदेमातरम्' पर भी सभी का हक है ...इन नारों का भी कोई 'राजनैतिक' ठेकेदार सिर्फ अपना ही नहीं कह सकता ...


kanhaiya1'कन्हैया' ने क्या नारे लगाये जरा सुने....
'हम ले कर रहेंगे आज़ादी'...'सामंतवाद से आज़ादी'...'पूंजीवाद से आज़ादी'....'संघवाद से आज़ादी'...'दंगाइयों से आज़ादी'...'भुखमरी से आज़ादी'....'गरीबी से आज़ादी'....'है जान से प्यारी आज़ादी'...
इन नारों में कुछ भी ऐसा नहीं जो 'देश द्रोह' की परिभाषा में आता हो ...जिस विडियो की बात की जा रही है अभी यह सत्यापित नहीं है कि उसके साथ छेड़-छाड़' नहीं हुई है ...पुलिस जांच जारी है...ऊपर से पुलिस कमिश्नर 'बस्सी' कह रहे हैं कि 'वे कन्हैया की जमानत का विरोध नहीं करेंगे'...आखिर क्यों...यदि आप एक तरफ 'कन्हैया' को देशद्रोही कह रहे हैं तो जमानत का विरोध क्यों नहीं....सच तो यह है कि आपके पास पुख्ता सबूत नहीं है ...आप 'राजनीति' के शिकार हैं ... 'कन्हैया' को 'वकील' के भेष में कुछ अराजक तत्वों ने कोर्ट परिसर में पुलिस की मौजूदगी में पीटा गया ...यानी कोर्ट से पहले ही सजा दे दी गयी...यह भी उचित नहीं ...
सरकार यदि चाहती तो इस घटना को स्थानीय कार्यवाही कर दबा सकती थी ...पूरे राष्ट्र को 'राष्ट्रवादी' बनाम 'राष्ट्रविरोधी' की श्रेणियों में बाँटने की कवायत क्यों हो रही है ....शायद राजनीति ही एकमात्र मकसद है ...एक नहीं दोनों पक्षों का ...बंगाल का चुनाव जो निकट है ...दोनों पक्ष इस प्रकरण का राजनैतिक लाभ पाना चाहते हैं ..
जे.एन.यू. के छात्र उमर खालिद व उसके मित्र यदि दोषी हैं और उन्होंने देश को टुकड़े करने...कश्मीर की आज़ादी की बात कही है ...या फिर 'किसी' आतंकवादी को महिमा मंडित किया है तो जांच कर कार्यवाही अवश्य हो ...परन्तु किसी संस्था...या सभी छात्रों को बिना सबूत के देशद्रोही कहना उचित नहीं ...शिक्षण संस्थाओं में 'गैर-जरुरी' सरकारी हस्तक्षेप उचित नहीं है ...सरकार को इस घटना को 'तिल का ताड़' नहीं बनने देना चाहिए ....अंत में नुकशान 'छात्रों' का ही होगा ...
साथ ही ...
यह भी सही है कि एंटी 'इस्टैब्लिशमेंट' काम करना जे.एन.यू. की परिपाटी रही है... अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी भी है लेकिन संसद पर हुए आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी मनाकर उसे शहीद बताना और भारत विरोधी नारे लगाना...जेएनयू में कथित हिंदुस्तान विरोधी करतूतों की एक लम्बी फेहरिस्त है... कभी तिरंगे का.. तो कभी देवी-देवताओं का अपमान...कभी भारतीय संस्कृति और भारतीय संविधान को नीचा दिखाना... हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान... महिषासुर को महिमामंडित करना... जैसी हरकतों को देश हित में नहीं कहा जा सकता....यह भी सोचनीय विषय है...
देखतें है ...यह प्रकरण क्या रूप धारण करता है ....

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