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परिवार को जिंदा रखने के लिए 13 साल का मासूम कर रहा है, मजदूरी

 Special News Coverage |  10 April 2016 7:11 AM GMT

परिवार को जिंदा रखने के लिए 13 साल का मासूम कर रहा है, मजदूरी

उत्तराखंड: कोटद्वार के भाबर क्षेत्र स्थित हल्दूखाता गांव में 13 साल का एक मासूम मजदूरी करने को मजबूर है। दरअसल उम्र के जिस पड़ाव में इस मासूम के कंधों पर स्कूल के बस्ते का बोझ होना चाहिए था, उस उम्र में इसके कंधों पर परिवार को जिंदा रखने के लिए मजदूरी के पत्थरों का बोझ है।

एक साल पहले अपने पिता को बिना इलाज के खो चुके विकास की मां को अपने पति के गुजर जाने का ऐसा सदमा लगा कि उसे भी लकवें ने बिस्तर पकड़ने के लिए मजबूर कर दिया। तीन भाइयों में सबसे बड़े विकास के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ गिर गया।उसके सामने मां को जिंदा रखने और परिवार को पालने के लिए ऐसे हालात खड़े कर दिए कि मजबूरन उसे गांव में ही मजदूरी करने के लिए विवश होना पड़ा।


बोक्सा जनजाति के इस परिवार की हालांकि समाज कल्याण विभाग को भी पूरी जानकारी है, लेकिन वह भी इस ओर आंखें मूंदे बैठा है और बालश्रम को बढ़ावा दे रहा है। बालश्रम की हकीकत यदि आप भी देखेंगे तो खुद समझ जाएंगे कि यह अपराध नहीं बल्कि परिवार को जिंदा रखने के लिए वह सच है जिसका जवाब कानून बनाने वालों के पास भी नही।

गांव के प्रधान की ओर से इस परिवार को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करवाने का प्रयास तो किया गया, लेकिन इस गरीब और मजबूर परिवार की शायद इस लिए नही सुनी गई क्योंकि सुविधा शुल्क के नाम पर इसके पास देने के लिए कुछ नही था। सरकार बाल श्रम को रोकने के लिए भले ही कई जनकल्याणकारी योजनाएं ही संचालित क्यों न कर रही है लेकिन उन योजनाओं की धरातल पर क्या स्थिति है। वह आप इस मजबूर विकास की कहानी से समझ गए होंगे।

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