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उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में मेंजर शहीद, नहीं मिला शव?

 Special News Coverage |  14 April 2016 7:11 AM GMT

उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में मेंजर शहीद, नहीं मिला शव?

मणिपुर: तामेंगलान्ग में बुधवार को मुठभेड़ में एक मेजर के शहीद होने के बाद सेना ने जिले में अपना तलाशी अभियान कुछ समय के लिए रोक दिया है, और दूरस्थ क्षेत्र से अधिकारी के शव को वापस लाने की कोशिश की जा रही है। सेना के अधिकारियों ने बताया कि तामेंगलांग जिले के नुंगबा क्षेत्र में घना जंगल है और वे 21 पैरा एसएफ के मेजर अमित देसवाल का शव वापस लाने में सफल नहीं हो सके हैं।

एक अधिकारी ने कहा पहले हम क्षेत्र को सुरक्षित करने और एक पहुंच मार्ग बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कि शव बरामद करने के लिए हमारे हेलीकॉप्टर सुरक्षित रूप से वहां जा सकें। घने जंगल की वजह से वहां पैदल जाना संभव नहीं है। देसवाल हरियाणा के झज्जर जिले के सुरेहती के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और साढ़े तीन साल का एक बेटा है।


सेना कि राष्ट्रीय राइफल और विशेष बल के जवानों के तलाशी अभियान के दौरान जेडयूएफ के उग्रवादियों से मुठभेड़ हो गई, जिसमें मेजर घायल हो गए। मुठभेड़ स्थल से तो उन्हें निकाल लिया गया था, लेकिन उनकी जान बचाई नहीं जा सकी। इससे पहले भी मुठभेड़ के दौरान सेना के जवानों ने एक उग्रवादी को मार गिराया था। सेना के अधिकारियों ने बताया कि इलाके में तलाशी अभियान जारी है।

उन्हें रोमांचक अभियानों की सफलता के बाद स्पेशल फोर्स के लिए चुना गया। और साल 2011 में उन्होंने इलाइट सर्विस ज्वाइन कर लिया। शारीरिक तौर पर उनकी मजबूती घाटक कोर्स नाम के प्रशिक्षण में दिखी, जहां उन्हें कमांडो डैगर बेस्ट स्टूडेंट का सम्मान दिया गया था।

यह एनकाउंटर मणिपुर के तामेंगलान्ग जिले के घने जंगल में हुआ। सर्च ऑपरेशन के दौरान जेलियानग्रोंग यूनाईटेड फ्रंट के आतंकियों ने स्पेशल फोर्स पर छिपकर हमला किया। दोनों ओर से काफी देर तक गोलियां चलती रहीं। मेजर अमित को पेट में कई गोलियां लगीं। उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अमित एक ट्रेंड कमांडो थे। 10 जून 2006 को उन्होंने आर्मी ज्वॉइन की थी। मणिपुर में उनकी तैनाती ऑपरेशन हिफाजत के तहत जनवरी 2016 में हुई थी।

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