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मुजफ्फरनगर दंगा : ढाई साल कोमा में रहे पीड़ित शख्स की मौत

 Special News Coverage |  20 April 2016 7:52 AM GMT

मुजफ्फरनगर दंगा : ढाई साल कोमा में रहे पीड़ित शख्स की मौत

मुजफ्फरनगर: ढाई साल से कोमा में जिन्दगी और मौत के बीच जूझ रहे दंगा पीडित मेहर आलम की आज सवेरे मौत हो गयी। सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर में हुए दंगो में जहां 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। वहीं सैकड़ों लोग घायल भी हुए थे। दंगों के दौरान सहारनपुर अड्डे की ओर से काम कर वापस घर लौट रहे रहमतनगर निवासी मेहर आलम को आनंदपुरी पैट्रोल पम्प के पास ही कुछ बलवाईयों ने रोक लिया तथा उस पर जान से मारने की नीयत से हमला बोल दिया। मेहर आलम को सडक किनारे से मरणासन्न अवस्था में बरामद किया गया था। मेहर आलम को बेहोशी की हालत में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। वहां से उसे गम्भीर अवस्था में मेरठ के लिये रैफर कर दिया गया।


इस मामले में शहर कोतवाली में दंगाईयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन आज तक मेहर आलम के हमलावर गिरफ्तार नहीं हो सके। सरकारी मदद के तौर पर मेहर आलम के परिवार को 50 हजार रुपये की राशि मिली थी। मेहर को डाक्टरों ने कोमा में बताया था। बीते दिनों हालत बिगडने पर मेहर को उसके परिजन मेरठ मैडिकल में ले गये। सोमवार की शाम ही वहां से मेहर आलम को घर लेकर आये। मंगलवार सवेरे करीब 6 बजे मेहर आलम ने दम तोड दिया। मेहर के भाई शाह आलम और अन्य लोगों ने आक्रोश जाहिर करते हुए शासन प्रशासन के खिलाफ मीनाक्षी चौक पर प्रदर्शन की।

मेहर के परिवार को उचित मुआवजा न मिलने पर परिजनों में रोष था। सूचना मिलने पर नगर मजिस्ट्रेट राजेन्द्र सिंह और सीओ सिटी डा. तेजवीर सिंह मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत की। परिजनों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि दंगों में मारे गये लोगों की तरह ही उनकी भी मदद की जाये। मेहर आलम को दंगा मृतक मानते हुए एक परिजन को सरकारी नौकरी और मुआवजा दिलाया जाये। नगर मजिस्ट्रेट राजेन्द्र सिंह ने भरोसा दिया कि जो भी संभव होगा मदद दिलायी जायेगी। अधिकारियों के आश्वासन पर परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराये बगैर सुपुर्दे खाक कर दिया।

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