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शराब पिलानेवालों की साजिश, नहीं होने देंगे सफल

 Special News Coverage |  15 April 2016 8:22 AM GMT

शराब पिलानेवालों की साजिश, नहीं होने देंगे सफल

पटना: नीतीश कुमार ने कहा शराबबंदी को चुनौती के रूप में लिया है और इसमें जरूर सफल होंगे। पीनेवालों को इसका लाभ तो समझ में आ गया, लेकिन पिलानेवालों का दिमाग रास्ते पर नहीं आया है। शराब का कारोबार करनेवाले ऐसे लोग अब भी साजिश रच रहे हैं। गुरुवार को एसके मेमोरियल हॉल में बिहार महादलित विकास मिशन की ओर से अायोजित विकास मित्रों की राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

शराबबंदी की शुरुआत बाबासाहेब भीमराव अांबेदकर की 125वीं जयंती, महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरा होने और गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती के मौके पर शुरू हुई है, यह अदभुत वर्ष है। मुस्तैदी में ढिलाई न हो डीजीपी की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री कहा कि ऐसा न हो कि एक दो माह सब ठप पड़ जाये। जिस तरह हर दिन भोजन जरूरी है, उसी तरह शराबबंदी के लिए बनायी गयी कार्ययोजना पर अमल जरूरी है।


नीतीश कुमार ने कहा कि शराब के कारोबार में बहुत कमाई थी। वे इतना कमाते थे कि उनको रुपये गिनने की फुरसत नहीं मिलती थी। ऐसे लोग साजिश करने से पीछे नहीं रहेंगे। शराबबंदी को बिहार में सामाजिक बदलाव बताते हुए उन्होंने कहा कि शराब किसी के जीवन का चौपट्ट कर देती है घर तबाह हो जाते हैं। कितने ही लोग असमय मौत के मुंह में चले जाते हैं। घरेलू हिंसा सबसे अधिक होती है। बच्चों को भोजन तक नहीं मिल पाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा मैंने इसी जगह से घोषणा की थी कि मौका मिला, तो इसे बंद करेंगे मौका मिला। 20 नंवबर को शपथ ली, 26 नवंबर को मद्य निषेध दिवस पर एक अप्रैल से इसे बंद करने की घोषणा कर दी। सबसे अधिक महिलाएं ओर बच्चे खुश हैं। विरोधी कहते हैं कि शराबबंदी में सफलता नहीं मिलेगी।

कुछ लोग शराब नहीं पीने के कारण बीमार पड़ेंगे, उन्हें नशामुक्ति केंद्र ले जाइए उनका इलाज होगा। मेरा स्वार्थ बिहार के गौरवशाली अतित की वापसी। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के अंत में ‘जय भीम’ का नारा लगाया। नेपाल ने नीतीश कुमार को भगवान बुद्ध की 2560वीं जयंती पर होनेवाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए न्योता भेजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून और चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग को आमंत्रित किया गया है।

1991 एक्ट के आधार पर तय है कि कहां ताड़ी बिकेगी, कहां नहीं बिकेगी। लोगों को अभी एक पेड़ से 2500 रुपये आय होती है, नयी व्यवस्था में छह हजार रुपये तक की कमाई होगी। लोग चाहते हैं कि पासी समाज ताड़ पर ही चढ़े इस समाज के लोग अब सरकारी सेवा में आ रहे हैं। उनका विकास हो रहा है। इसी समाज का समूह बना कर नीरा का कारोबार करेंगे। इससे उनकी इज्जत भी बढ़ेगी। इस समाज के अशोक चौधरी व मुनेश्वर चौधरी हमारे साथ हैं।

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