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नोएडा प्लॉट घोटाले में IAS राजीव कुमार को यूपी सरकार ने किया सस्पेंड

 Special News Coverage |  21 April 2016 7:41 AM GMT

नोएडा प्लॉट घोटाले में IAS राजीव कुमार को यूपी सरकार ने किया सस्पेंड

लखनऊ: नोएडा प्लॉट घोटाले में प्रदेश सरकार ने जेल में बंद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव कुमार को सस्पेंड कर दिया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद बुधवार देर रात राजीव कुमार को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए।

मुख्य सचिव आलोक रंजन के नेतृत्व में बुधवार की शाम मीटिंग हुई। जिसके बाद राजीव कुमार को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया। देर शाम इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया। अब आरोप पत्र दिया जाएगा, जिसका जवाब मिलने पर सरकार आगे की कोई कार्रवाई करेगी। बता दें वरिष्ठ आईएएस अफसर राजीव कुमार ने बीते सोमवार को सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। जहां से उन्हें जेल भेज दि‍या गया था।


सूत्रों के अनुसार नोएडा प्लॉट घोटाले में तीन साल की सजा पाए राजीव कुमार को जेल में बुधवार को 48 घंटे से ज्यादा समय हो गया है। वे सजायाफ्ता भी हैं। इसलिए उनके जमानत की उम्मीद भी कम ही है। जेल की रिपोर्ट मिलने के बाद उनको निलंबित करने का फैसला किया गया। यदि सरकार निलंबित नहीं करती तब भी उन्हें जेल में 48 घंटे गुजारने पर नियमानुसार डीम्ड सस्पेंड मान लिया जाता। अब निलंबन के बाद विभागीय जांच कमेटी बनेगी। जिसकी रिपोर्ट पर राजीव कुमार को आईएएस सेवा से बर्खास्त करने की केंद्र सरकार और संघ लोक सेवा आयोग से सिफारिश की जाएगी।

क्या था मामला
नोएडा एंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जाँच ब्यूरो ने 1971 बैच की आईएएस और यूपी की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव पर भूखंड आवंटित करने में अनियमितताएं बरतने के आरोप की जांच की थी और एक रिपार्ट दर्ज की थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री से नीरा के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति ली गई थी। सीबीआई ने कोर्ट में दो अलग-अलग चार्जशीट भी दाखिल की थी, जिसमें एक चार्जशीट नोएडा प्राधिकरण की पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी नीरा यादव व मेरठ के मंडलायुक्त रहे राजीव कुमार को देकर उन्हें आरोपी बनाया गया था। दूसरे मामले में नीरा यादव पर अपनी पुत्रियों के लिए भूखंड आवंटित करने में अनियमितताएं बरतने का आरोप है।

राजीव कुमार को कोर्ट ने नोएडा सेक्टर-14ए में एक गेस्ट हाउस के लैंडयूज को बदलकर उसे रेसीडेंशियल करवाने और ग्रीन बेल्ट की 105 वर्गमीटर अतिरिक्त भूखंड को अवैध तरीके से शामिल करने का दोषी पाया था और उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी।

आपको बता दें कि प्राधिकरण की पूर्व चेयरमैन और पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नीरा यादव इसी मामले में पहले ही सरेंडर कर जेल जा चुकी हैं। इसे लेकर दोनों दोषी ने हाईकोर्ट में भी गुहार लगाई थी। जहां उनकी याचिका 25 फरवरी को खारिज कर दी गई थी। हालांकि नीरा यादव ने 14 मार्च को सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया था लेकिन राजीव कुमार सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 28 मार्च को उन्हें सरेंडर के लिए 4 सप्ताह का समय दे दिया था।

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