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अब दुर्घटना में मददगारों को पुलिस नहीं करेगी परेशान, पढ़ें गाइडलाइंस

 Special News Coverage |  31 March 2016 1:29 PM GMT



नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में घायल की मदद करने वाले लोगों को पुलिस परेशानी से बचाने के लिए एक अहम आदेश जारी किया है। यदि कोई व्यक्ति सड़क हादसे में शिकार हुए व्यक्ति की मदद करता है तो अब वो कानूनी उलझनों में नहीं फसेंगे और पुलिस भी उस व्यक्ति को परेशान नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने इस संदर्भ में सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की तरफ से इस बारे में बनाई गई गाइडलाइन्स को मंजूरी दे दी है और पूरे देश में इसका पालन किए जाने को कहा है।


कई बार देखा गया है सड़क हादसे में घायल लोगों की मदद करने वालों से पुलिस कई तरह की सवाल पूछती है, इसके चलते लोग इन कानूनी झंझटों से बचने के लिए घायल लोगों की मदद करने से कतराते रहते हैं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप में कहा है कि पुलिस ऐसे मददगारों को परेशान न करने के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने गाइडलाइंस में कहा है कि :
*दुर्घटना के बाद पुलिस या एम्बुलेंस को बुलाने वाले से जबरन उसकी पहचान नहीं पूछी जाएगी।
*सड़क हादसे में जख्मी को अस्पताल पहुंचाने पर पुलिस पूछताछ के लिए उन्हें नहीं रोकेगी।
*मदद करने वाला अगर बिना अपनी पहचान बताये बिना अस्पताल से जाना चाहता है तो उसे जाने देना चाहिए।
*अस्पताल के लिए भी निर्देश दिये गये हैं बिना किसी पूछताछ के घायल का इलाज तुरंत करना होगा।
*सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि मददगार का एक बार में ही बयान दर्ज किया जाए।
*अगर घायल की मदद करने वाला अपनी पहचान बताता है और जांच में मदद को तैयार है तब भी उसे कम से कम परेशान किया जाए।
*घायल लोगों की मदद करने वालों को पुलिस वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए कोर्ट में गवाही कराने की वयवस्ता भी करेगी।
*अगर वो पहचान बताए बिना जाना चाहे तो जाने दिया जाएगा।
*हॉस्पिटल घायल का तुरन्त इलाज शुरू करेंगे और पुलिस के आने तक उस शख्स को रुकने के लिए बाध्य नहीं करेंगे।
*हॉस्पिटल पहुँचने वाले घायल का इलाज न करने वाला डॉक्टर प्रोफेशनल मिसकंडक्ट का दोषी माना जाएगा।
*हॉस्पिटल अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में बोर्ड लगाएंगे, जिसमें लिखा होगा कि सड़क दुर्घटना में घायल की मदद करने वालों को अस्पताल में परेशान नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश जारी किया है कि वह उनके इन दिशा-निर्देशों को आम जनता, देश के सभी अस्पतालों और सभी पुलिसकर्मियों तक पहुंचाए। जिससे कि इस संबंध में जागरूकता फैल सके। आदेश का पालन न करने वाले पुलिस कर्मियों और अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा तैयार की गई गाइडलाइंस पर अपनी कानूनी मुहर लगा दी है।

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