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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन कांग्रेस देगी अदालत में चुनौती

 Special News Coverage |  28 March 2016 9:03 AM GMT

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन कांग्रेस देगी अदालत में चुनौती
उत्तराखंड : नौ दिन से जारी राजनीतिक नाटक और अनिश्चितता को समाप्त करते हुए केंद्र ने रविवार को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया। साथ ही सत्तारूढ़ कांग्रेस में विद्रोह के बीच संवैधानिक अव्यवस्था का हवाला देते हुए विधानसभा को निलंबित कर दिया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश पर रविवार सुबह संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत उद्घोषणा पर हस्ताक्षर करते हुए हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर दिया और विधानसभा को निलंबित कर दिया।


कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतंत्र की हत्या और काला दिन करार देते हुए इसकी निंदा की और कहा कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। इस बीच सीआरपीएफ के पूर्व डीजी प्रकाश मिश्रा और पूर्व केंद्रीय संस्कृति सचिव रविंद्र सिंह को उत्तराखंड के राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया गया। केंद्र का नजरिया यह था कि 18 मार्च के बाद रावत सरकार का बना रहना अनैतिक व असंवैधानिक है। क्योंकि उस दिन विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों सहित 35 विधायकों की ओर से मत विभाजन की मांग को अनुमति नहीं देने की विवादित परिस्थितियों में विनियोग विधेयक को पारित घोषित किया था। जिनमें उन्होंने राजनीतिक स्थिति को अस्थिर बताया था और राज्य विधानसभा में सोमवार को प्रस्तावित शक्ति परीक्षण में हंगामा होने की आशंका को लेकर चिंता जताई थी।

समझा जाता है कि मुख्यमंत्री रावत के खिलाफ हुए और शनिवार को सार्वजनिक रूप से सामने आए स्टिंग आपरेशन की कथित सीडी कैबिनेट के फैसले में एक कारक थी। खबर है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रपति को शनिवार रात कैबिनेट की सिफारिश के आधार के बारे में बताया। रावत सरकार की बर्खास्तगी से 28 मार्च को प्रस्तावित विश्वास मत अब निष्प्रभावी हो गया है। इससे पहले खबरें थीं कि विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने नौ बागी कांग्रेस विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया। जिससे रावत विश्वास मत हासिल करने में सफल हो सकते थे। कांग्रेस की ओर से साजिश की आशंका जताने के बीच जेटली ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने को सही ठहराया और कहा कि हरीश रावत सरकार 18 मार्च से असंवैधानिक और अनैतिक थी जब गिरने के बावजूद विनियोग विधेयक पारित हुआ दिखाया गया।

उधर कांग्रेस ने इस फैसले की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया और कहा कि ‘हम अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे। हम राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर करेंगे और इसे वापस लिए जाने की मांग करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हम अदालत में उन्हें कानून बताएंगे। केंद्र सरकार में बैठे लोग ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की अपनी नीति की वजह से कांग्रेस शासित प्रत्येक राज्य को अस्थिर करने के लिए जिम्मेदार हैं।’ सिब्बल ने कहा, ‘मैं हैरान हूं कि कोई सरकार जो लोकतंत्र और संविधान में विश्वास करती है वो किसी पार्टी की विरासत को समाप्त करने की कोशिश करेगी।

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