Home > Archived > लबनी और बलेठा लेकर सड़क पर उतरे पासी समाज

लबनी और बलेठा लेकर सड़क पर उतरे पासी समाज

 Special News Coverage |  14 April 2016 11:21 AM GMT

लबनी और बलेठा लेकर सड़क पर उतरे पासी समाज

गया: बिहार में ताड़ी पर लगाये गये प्रतिबंध के विरोध में गया में पासी समाज के लोगों ने मार्च निकाला अंबेडकर पार्क से गांधी मैदान तक लबनी-बलेठा रैली निकाली गई। रैली में पासी समाज के हजारों महिला पुरूष अपनी ताड़ी की व्यवस्था में काम आने वाले परम्परागत सामान का प्रदर्शन करते हुए पहुंचे।

पासी समाज ने नीतीश सरकार के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। रैली में शामिल महिलाओं ने नीतीश कुमार पर पीठ के बजाय पेट पर लात मारने का आरोप लगाते हुए पहले की तरह ही ताड़ी की बिक्री कराने की अनुमति देने की मांग की। पासी समाज के लोगों के मुताबिक ताड़ी को शराब की श्रेणी में लाना समझ से परे है। प्रदेश में भाजपा सहित अन्य विपक्षी दल भी ताड़ीबंदी के सरकार के फैसले पर सवाल खड़ा कर रहें हैं।


पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि ताड़ी प्राकृतिक पेय है। इस पर पाबंदी दलितों पर ज़ुर्म है। पासी जाति के लोगों का रोजगार नहीं छीनना चाहिए। उनके लिए जीवन बीमा करवाना चाहिए। श्री मांझी ने ये बातें सोमवार को ताड़ी विक्रेता संघ की ओर से आयोजित जनसभा में कही।उन्होंने कहा कि सरकार को बिना विकल्प खोजे ताड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए था। ताड़ी शराब नहीं है। इस पर प्रतिबंध आईएएस केके पाठक की देन है।

नीतीश कुमार ने बिना परामर्श के श्री पाठक के कहने पर प्रतिबंध लगा दिया। जबकि महुआ और ताड़ी गरीबों को सेहतमंद बनाने के लिए जरूरी है। मांझी ने कहा कि आज ताड़ी सिर्फ पासी जाति के लोगों का व्यवसाय नहीं रहा। यह आदिवासियों, अत्यंत पिछड़ी जातियों का भी व्यवसाय बन चुका है। सरकार ताड़ी में मिलावट की बात कहती है, लेकिन दूध, सब्जी, खोआ अधिकतर चीजों में मिलावट है। इंजेक्शन लगाकर दूध निकाला जा रहा है। सरकार क्या इन पर भी प्रतिबंध लगाएगी। वर्ष 1977 में भी ताड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।

Tags:    
Share it
Top