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बॉर्डर पर शिकार की मनाही के बाबजूद सरहद पर पकती है गोश्त की हांडी

 Special News Coverage |  13 March 2016 10:46 AM GMT


Frozen Woods_THE INDIAN WILD BOAR- Suar (Sus Scrofa)
फिरोज़पुर एच एम त्रिखा विशेष रिपोर्ट

पंजाब में फिरोज़पुर के हिन्द पाक सरहदी इलाकों में खेती कर रहे किसान अब खेती के साथ साथ बार्डर के संवेदनशील इलाकों में बेहद बर्बरता पूर्ण हथकंडे अपना कर सूअरों को जाल में फंसा कर उन्हें अपना शिकार तो बना ही रहें हैं। उनका गोश्त सरहद पर ही खाने के वास्ते किसान सूअरों को यहां करंट के झटके दे दे कर मार रहे हैं।


कुल्हाड़ियों एवंम फावड़े से ही उनके टुकड़े कर कर के हांडी में डाला जा रहा है। सरहद पर ही तपाया जा रहा है। चूल्हा और चूल्हे पर हांडी रख कर पकाया जा रहा है। सूअरों का गोश्त यहीं पर बीएसऍफ़ के चंद जवान भी किसानो के साथ मिलकर सूअरों के गोश्त का मजा लूट रहें हैं। यही पर सतलुज दरिआ में जाल फैंक कर किसान मछलियाँ पकड़ रहें है॥ सरहद पर ही उन्हें भी भून कर खा रहे हैं।



आपको बता दें कि ये इलाका शिकार के लिए पाबंदी शुदा है। जहां सूअरों व मछलियों के शिकार का गोरख धंधा फल फूल रहा है। वो भी वर्दी धारी बीएसऍफ़ जवानो के सामने उपरोक्त तमाम जानकारियां पुख्ता सूत्रों ने देते हुए बताया है की फिरोज़पुर की बार्डर बेल्ट पर किसान खेती के साथ साथ सूअरों व मछलियों को जाल में फैंक कर फंसा रहें हैं। ये सारा गोरख धंधा सरहद के उन पाबंदी शुदा इलाकों में हो रहा है। जहां शिकार पर तो पाबंदी है ही परिंदों को पर मारने की भी आज़ादी नही है। क्योंकि यहां भारतीय फ़ौज़ का 24 घंटे पहरा है।


सूत्र बता रहें हैं की चंद किसान सूअरों को मारने के लिए जाल फैला देते हैं और किसान हाथों में डंडे लेकर दूर दूर फ़ैल जाते हैं। जैसे ही कोई जंगली सूअर उनके दायरे में आ जाता ह॥ तमाम घेरा डाले किसान उस जंगली सूअर को चारों और से घेर कर डंडों से हांकते जाल तक ला कर जाल में फंसा लेते हैं। अब इसके बाद सरहद पर ही करंट वाली तारों से बिजली के झटके देकर सूअरों को तड़पा तड़पा कर मौत के घाट उतार दिया जाता है। किसान खेती व लकड़ी चीरने के वास्ते जिस फावड़े व कुल्हाड़ी को सरहद पर लेकर जाते हैं। उसी कुल्हाड़ी से ही जंगली सूअरों को काट काट कर हांडी में डाल दिया जाता है। सरहद पर ही लकड़ियाँ जला कर किसान यहीं पर चूल्हा जला देते हैं और इसी चूल्हे पर पक जाता है गोश्त जिसे मजे ले ले कर जहां किसान खाते है।

वहीं इस गोश्त में से हिस्सा वर्दी धारी जवानो को भी मिलता है। जंगली सूअर के मांस का आचार भी जवान बेहद शौक से खाते है।

सूत्र बताते हैं की आचार के लिए जंगली सूअरों का कच्चा मांस भी जवानों को मुहैया करवा दिया जाता है। यहीं पर सतलुज दरिआ है जहां जाल बिछा कर किसान पाबंदीशुदा इलाके में मछलियाँ पकड़ते हैं और इन्हे भी खेती वाली जमीनो पर ही भुना व खाया जा रहा है। सारा धंधा काटों वाली तारों के पार जा कर किसान कर रहें है।

सूत्र बताते हैं की सब कुछ बीएसऍफ़ जवानों के सामने हो रहा है। पाबंदीशुदा इलाके में जाल, हांडी,कुल्हाड़ी मसालों का इस्तेमाल,चूल्हा व सूअरों, मछलियों का शिकार हिन्द पाकि सरहद की संवेदनशीलता पर अनेकों सवाल खड़े कर रहा है। दूसरी तरफ जिले के डिप्टी कमिश्नर डीपी एस खरबंदा ने मामले पर बोलते हुए जोरदार शब्दों में कहा की मैं मामले की जाँच करूंगा। डीआईजी आर के थापा बीएसऍफ़ मामले पर बोले सब बेबुनियाद है निराधार है।

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