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आज़म की बजह से RTI एक्टिविस्ट ने लिखा UN को पत्र, आज़म मुझे भी मार देंगें

 Special News Coverage |  18 March 2016 6:45 AM GMT


रामपुर
आज राजनीति में द्वेष और बदले की भावना बढ़ गई है। इस लिहाज से आपातकाल के डर से इंकार नहीं किया जा सकता। राजनीति में द्वेष और गलत भावनाएं भारतीय कानून और संविधान को खतरे में पूरी तरह से डाल दिया है जोकि लोकतंत्र के लिए खतरा है। ऐसे में आपातकाल की वापसी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


आज आपातकाल के बारे में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। प्रेस की आज़ादी और नागरिक स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता नज़र नहीं आती है। हमें लोकतंत्र की शक्तियों को मज़बूत करने की ज़रूरत है।


क्या है मामला
मौलिक अधिकारों में फिर से कटौती हो सकती है।' क्योंकि शासक वर्ग नौकरशाही, पुलिस और अन्य वर्गों के पूर्ण सहयोग से अधिनायकवादी और लोकतंत्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त है। इंदिरा गांधी के आपातकाल लागू करने से सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ था कि राजनीति और अन्य लोकतांत्रिक संस्थानों में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो गया था। उस रुझान में आज तक बदलाव नहीं आ पाया है। इंदिरा गांधी कानून के ऊपर हो गई थीं। प्रेस का गला घोट दिया गया था। राजनीतिक नेताओं से लेकर सामान्य जनता तक, एक लाख लोगों को बिना किसी आरोप के हिरासत में ले लिया गया था। जेसे की रामपुर निवासी प्रसिद्ध आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता दानिश खान को 10 महीना बिनाह वजह रामपुर जेल में एक आतंकवादी की तरह रखा गया उनका क़सूर सिर्फ इतना था की लोकतंत्र की रक्षा करने को आईपीएस अमिताभ ठाकुर के साथ मिलकर दलित लोगो की बस्ती बचाई जिसमे उत्तर प्रदेश सरकार को शिकस्त हुई । इस घटना से दानिश खान का पूरा परिवार ख़त्म हो चूका है जो घटना दानिश के साथ घटी उसको मीडिया के भी सामने लाने से रोका गया ।



रामपुर के आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आजम खान की प्रताड़ना से तंग आकर दानिश खान ने यूनाइटेड नेशन को पत्र लिखकर किसी अन्य देश में शरण की गुहार लगाई है। फिलहाल इस मामले को राष्ट्रपति ने गंभीरता से लेते हुए यूपी के मुख्या सचिव से रिपोर्ट मांगी है।रामपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र में रहने वाले दानिश खान समाजसेवी और आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। वे निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर से भी जुड़े हुए हैं। अभी हाल ही में ही वाल्मीकि बस्ती को उजाड़ने के विरोध में जब अमिताभ ठाकुर और नूतन यहां पहुंची थीं तो वे भी उनके साथ थे। दानिश ने आरोप लगाया है कि अमिताभ और नूतन के साथ काम करने की वजह से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। पत्र में दानिश ने लिखा है कि, ‘भारत में शोषण और न्याय न मिल पाने की वजह से वे किसी अन्य देश में भारत की नागरिकता समाप्त करके शरण लेना चाहते हैं।’दानिश ने आजम पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें झूठे केस में जेल भिजवाया गया। इतना ही नहीं उन्हें 10 महीने तक जमानत भी नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके जेल जाने के सदमे में उनकी मां और बहन की मौत हो गई। इसके बावजूद उन्हें मां और बहन की मिट्टी में शामिल होने के लिए पैरोल भी नहीं दिया गया। दानिश ने कहा कि यह सब कुछ आजम खान के इशारे पर किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने गरीबों की लड़ाई लड़ी और उनकी आवाज बुलंद की।





मीडिया पर नकेल कसने के लिये अब सरकारों को आपातकाल लगाने की भी जरुरत नहीं है।
यह सवाल इसलिये क्योंकि इकतालीस साल पहले आपातकाल के वक्त मीडिया जिस तेवर से पत्रकारिता कर रहा था आज उसी तेवर से मीडिया एक बिजनेस मॉडल में बदल चुका है, जहां सरकार के साथ खड़े हुये बगैर मुनाफा बनाया नहीं जा सकता है। और कमाई ना होगी तो मीडिया हाउस अपनी मौत खुद ही मर जायेगा। यानी 1975 वाले दौर की जरुरत नहीं जब इमरजेन्सी लगने पर अखबार के दफ्तर में ब्लैक आउट कर दिया जाये। या संपादकों को सूचना मंत्री सामने बैठाकर बताये कि सरकार के खिलाफ कुछ लिखा तो अखबार बंद हो जायेगा। या फिर पीएम के कसीदे ही गढ़े। अब के हालात और इकतालीस बरस पहले हालात में कितना अंतर आ गया है?' दानिश जो इस देश का नागरिक है और सामाजिक कार्यकर्त्ता है वह अपनी नागरिकता वापस करने तक को आमादा है और शोषण व अत्याचार से बचने को दूसरे देश में शरण पाने की गुहार लगा रहा और मीडिया खामोश है । आज हालात चिंताजनक हैं जो भविष्य की ओर यह इंगित करते हैं कि आगे एक कठिन समय आ सकता है। इन स्थितियों के मद्देनजर यह आशंका स्वाभाविक है कि कोई आपात स्थिति जन्म न ले ले। अतः देश की जनता को सावधान रहने की आवश्यकता है।

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