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पीलीभीत : सिख फर्जी मुठभेड़ में 47 पुलिसवालों को उम्रकैद

 Special News Coverage |  4 April 2016 12:11 PM GMT

पीलीभीत : सिख फर्जी मुठभेड़ में 47 पुलिसवालों को उम्रकैद
यूपी: पीलीभीत में जून 1991 में 10 सिख तीर्थ यात्रियों को आतंकवादी बता कर मारने वाले 47 पुलिसकर्मियों को आज लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। पुलिस ने कहा था कि उसने 10 आतंकवादियों को एनकाउंटर में मार गिराया, लेकिन जब यह पता चला कि वे सिख तीर्थ यात्री थे तो हंगामा खड़ा गया।

29 जून 1991 को यूपी के सितार गंज से 25 सिख तीर्थयात्रियों का जत्था पटना साहिब, हुज़ूर साहिब और और नानकमत्ता साहिब के दर्शन के लिए निकला था। 13 जुलाई को उसे पीलीभीत आना था, लेकिन 12 जुलाई को ही पीलीभीत से पहले 60-70 पुलिस वालों ने उनकी बस को घेर लिया और उन्हें उतार लिया। बस में 13 पुरुष, महिलाएं और 3 बच्चे थे। पुलिस ने महिलाओं, बच्चों और दो बुजुर्ग पुरुषों को छोड़ दिया, लेकिन 11 पुरुषों को वे अपने साथ ले गए।


इनमें से एक तलविंदर सिंह को पुलिस ने मार कर नदी में बहा दिया। बाकी दस सिखों को पुलिस वाले सारे दिन अपनी बस में शहर घुमाते रहे, लेकिन रात में उनके हाथ पीछे बांधकर तीन टोलियों में बांट दिया। दो टोली में चार-चार सिख और एक में दो सिख रखे गए। इन सभी को तीन अलग-अलग जंगलों में ले जाकर गोली मार दी गई।

पहले केस सिविल पुलिस के पास था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सीबीआई जांच शुरू हुई। सीबीआई ने 178 गवाह बनाए, 207 दस्तावेज सबूत के लिए लगाए और पुलिसकर्मियों के हथियार, कारतूस और 101 दूसरी चीजें सबूत के तौर पर पेश कीं। आखिरकार सीबीआई ने अदालत में यह साबित कर दिया कि पुलिस ने अपना "गुड वर्क "दिखाने के लिए तीर्थ यात्रियों को आतंकवादी बता कर मार डाला।

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