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सुप्रीम कोर्ट ने डांस बार को प्रतिबंधित करने पर लगाई रोक, महाराष्ट्र सरकार चाहती है पाबंदी

 Special News Coverage |  15 Oct 2015 1:37 PM GMT

dance bar


मुंबई: महाराष्ट्र के डांस बार फिर से खुल सकते हैं क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने आज इन पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्य के कानून के क्रियान्वयन पर इस शर्त के साथ रोक लगा दी कि नत्य अश्लील नहीं होना चाहिए। उधर, महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि वह पाबंदी बरकरार रखने पर जोर देगी।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंत की पीठ ने कहा कि हम महाराष्ट्र पुलिस (द्वितीय संशोधन) कानून की धारा 33 (ए) (1) के प्रावधानों पर रोक लगाना उचित समझते हैं।


शीर्ष अदालत के इस आदेश ने हजारों बार डांसरों और रेस्तरां मालिकों को बड़ी राहत दी है। इसके साथ ही न्यायालय ने अपने आदेश में एक शर्त भी लगाई कि नृत्य के दौरान किसी भी तरह की अश्लीलता वाली भाव भंगिमा नहीं होनी चाहिए और लाइसेंस देने वाले प्राधिकार को इनके नियमन की शक्ति दी ताकि महिला कलाकारों की गरिमा को किसी प्रकार की ठेस नहीं पहुंचे।

शीर्ष अदालत ने इंडियन होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन की याचिका अंतिम सुनवाई के लिए पांच नवंबर को सूचीबद्ध की और कहा कि इसी मसले से संबंधित मामले में यह न्यायालय 2013 में पहले ही निर्णय कर चुकी है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि एसोसिएशन को अंतरिम राहत दी जा सकती है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार शीर्ष अदालत में बारों तथा अन्य स्थलों पर नृत्य के आयोजन पर पाबंदी बनाए रखने की अपनी मांग पर जोर देगी। अपनी पुरानी भूमिका को बरकरार रखते हुए मौजूदा बीजेपी सरकार भी राज्य में डान्स बार शुरू होने के पक्ष में नहीं। सूबे के मुखिया देवेन्द्र फडणवीस ने संवाददाताओं से बात करते हुए साफ़ कहा है कि उनकी सरकार डान्स बार पर पाबन्दी के पक्ष में है।

बता दें 2005 में पुलिस ने राज्य के डांस बार पर कड़ी कार्यवाही की थी जिसमें पांच सितारा होटलों को छोड़ दिया गया था। 2013 में उच्चतम न्यायालय ने डांस बार को जारी रखने का आदेश दिया था लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा ने जून 2014 में इन बारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक कानून पारित कर दिया। सभी राजनीतिक पार्टियां इस मामले में एकमत थीं और बिना किसी आपत्ति के इस कानून को पास कर दिया गया था।

लेकिन रेस्त्रां मालिकों ने इस कानून को यह कहकर चुनौती दी कि जब एक साल पहले कोर्ट ने बार में डांस करने पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को खारिज कर दिया था तो फिर राज्य सरकार एक बार फिर बार पर रोक लगाने के लिए नया कानून कैसे ला सकती है। कोर्ट ने माना कि उसने ऐसे ही एक प्रावधान को रद्द किया था लेकिन कानून को एक बार फिर नए तरीके से लाया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।

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