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यूनिवर्सिटी में बीफ खाने के सुझाव पर मचा बवाल

 Special News Coverage |  15 April 2016 12:27 PM GMT

यूनिवर्सिटी में बीफ खाने के सुझाव पर मचा बवाल

लखनऊ: अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में गुरुवार को आयोजित अम्बेडकर जयंती पर आयोजित नेशनल सेमिनार में उस्मानिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कांचा इलैया बोले कि बीफ खाने से दिमाग तेज होता है। हम लोग शाकाहारी है जिसकी वजह से हमारा दिमाग डिब्बा हो गया है। विदेशों में सभी बीफ का सेवन करते हैं इसलिए उनका दिमाग तेजी से बढ़ रहा है। प्रोफेसर इलैया के इस बयान को सुनते ही वहां बैठे स्टूडेंट्स उग्र हो गए।

आधुनिक भारत के विकास में डॉ.बीआर अंबेडकर का योगदान विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी के समापन पर बोल रहे थे। हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के बीफ खाने के बयान ने यूनिवर्सिटी के माहौल को गरम कर दिया। प्रोफेसर के बयान के बाद ऑर्डिटोरियम में बैठे स्टूडेंट्स ने हंगामा करना शुरू कर दिया। जिसे किसी तरह यूनिवर्सिटी प्रशासन काबू पा सका।


वहीं प्रो कांचा इलैया ने पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि देश में स्वच्छ भारत अभियान नहीं चल पाएगा। मोदी के कभी कभी झाड़ू लगाने से क्या होता है वो तो शूद्र है। अरुण जेटली से झाड़ू लगवाए, अरुण शौरी को लाएं और झाड़ू लगवाएं तो हो अभियान।

प्रो कांचा के इस विवादास्पद बयान पर जहां हंगामा शुरू हो गया तो बीबीएयू का सेमिनार हॉल में दो गुटो में बंट गया। एक छात्र गुट प्रो कांचा के जिंदाबाद व अरुण जेटली मुर्दाबाद के नारे लगा रहा था। दूसरे गुट ने प्रो कांचा के संबोधन के बाद उनसे सवाल जवाब करना शुरू कर दिया। प्रो कांचा ने सेमिनार में आगे बीजेपी और ब्राह्मणवाद पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी आज पीएम है तो अम्बेडकर के निष्पक्ष संविधान लेखन के कारण हैं। ब्राह्मण पंडितो ने जो वेद लिखे हैं उसके आधार पर वह कभी पीएम न बन पाते। पीएम तो दूर की बात वह किसी छोटे मंदिर के पुजारी तक न बन पाते।

यूनिवर्सिटी में पिछले कुछ महीनों में हुए विवादों को देखते हुए वीसी ने कार्यक्रम के आयोजन समिति का लेटर जारी कर साफ- साफ कहा था, कि इस सेमिनार में ऐसे किसी व्यक्ति का न बुलाया जाएं। जिनके बयान से विवाद खड़ा हो जाएं। इसके बाद भी सेमिनार के आयोजन समिति के सेक्रेटरी ने वीसी के ऑर्डर को अनसुना कर दिया। प्रो कांचा इलैया का यह निजी वक्तव्य है। उनके भाषण की रिकॉर्डिग संरक्षित कर ली गई है। जरूत पड़ने पर इसकी जांच भी कराई जाएगी। यूनिवर्सिटी का इसे कुछ लेना देना नहीं हैं।

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