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किसानों के ऊपर टूटता कहर, आखिर कैसे धरे धीर जब कुदरत और सरकार सभी हो बेपीर

 Special News Coverage |  18 April 2016 2:18 AM GMT

kisan-hatya

उन्नाव जितेंद्र मिश्रा
कुदरत का कहर किसानों पर पिछले तीन सालों से बरस रहा है। कभी सूखा तो कभी ओलावृष्टि के साथ बेमौसम बरसात अब इस बार रबी की फसल भीषण गर्मी के चलते समय से पहले ही पक गयी नतीजा उत्पादन कम हुआ जिससे किसान काफी परेशान है उस पर भी सरकारी क्रय केन्द्रो पर खरीद दरें उल्टे किसानों को मुंह चिढ़ा रही है।

विकासखण्ड के किसानों में इनदिनों भारी हतासा है। क्षेत्र के किसान कमलेश,रामसागर,गया प्रसाद,भुजई आदि ने बताया कि पिछले तीन सालों से खेती किसानी अच्छी नही हो पा रही है कभी कुदरत की मार तो कभी नहरों और नलकूपों के साथ खाद बीज न मिला समस्या बनी हुई है जिससे किसानों के सामने भुखमरी और घाटे की खेती करनी पड़ रही है।


विकासखण्ड नवाबगंज के आशाखेड़ा,रवनहार,एतवारपुर,सोहरामऊ,परसंदन एवं अजगैन सहित दर्जनों गांवो के किसानों ने बताया कि इस बार गेंहू की फसल किसानों ने चाहे जब बोई हो लेकिन सभी की फसल मार्च माह में ही पक गयी इस दौरान किसान खेत में गेहूं की फसल में चार बार पानी लगा सिंचाई कर लेता था लेकिन इस बाद तीन सिंचाई में ही सभी की फसल ज्यादातर एक साथ पक गयी इसका नतीजा यह हुआ कि गेहूं के दाने हल्के और कम वनज के हुए जिससे उत्पादन में 50 से 60 फीसदी तक गिरावट होने से किसानों को भारी नुक्सान उठाना पड़ा है। कृषक रामआसरे ने बताया कि अगर कुदरत मेहरबान रहे तो एक बीघे खेत में 10 कुन्टल गेहूं का उत्पादन होता था लेकिन इस बार किसी के खेत में 4 कुन्टल तो किसी के खेत में 5 कुन्टल से ज्यादा प्रति बीघे गेहूं का उत्पादन नही हुआ है। इससे किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ा है उस पर किसानों के गेहूं का समर्थन मूल्य 1525 है जो पिछली बार की तुलना में मात्र 25 रूपये ही सरकार ने बढ़ाया है।


लगातार मौसम में भारी फेर बदल प्रकृति कर रही है जिससे किसानों की फसलो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है इस बार मार्च के शुरू में ही तापमान 25 से 40 डिग्री पहुंच गया जिसका नतीजा यह रहा कि किसान की गेहूं की फसल निर्धारित समय से पहले ही पक गयी जिससे गेहूं के बीच हल्के और कम वनज वाले हुए इसकी का नतीजा रहा कि उत्पादन में काफी गिरावट हुई है।

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