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यूपी में डीजीपी नियुक्ति, एक हाथ ले दूसरे हाथ दे पेटर्न पर?- अमिताभ ठाकुर

 Special News Coverage |  3 Jan 2016 1:23 PM GMT

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लखनऊः यूपी में नए डीजीपी एस जावीद अहमद से यूपी में 13 सीनियर आईपीएस अफसर मौजूद हैं। फिर इनसे सीनियर 13 आईपीएस अधिकारीयों की अनदेखी क्यों की गई। सरकार के पास इसका कोई ठोस जबाब नहीं है।

इसे भी पढ़ें -15 IPS अफसरों को सुपर सीट करके क्यों बनाया जावीद को पुलिस महानिदेशक -डा0 चन्द्रमोहन



इन 13 आईपीएस अफसर में 8 अफसर, डीजी रंजन द्विवेदी, डीजी सुलखन सिंह, डीजी विजय सिंह, डीजी विजय कुमार गुप्ता,डीजी प्रवीण सिंह, डीजी डॉ सूर्य कुमार, डीजी राम नारायण सिंह और डीजी हरीश चन्द्र सिंह अभी राज्य सरकार में काम कर रहे हैं।


सीनियर आईपीएस डीजी रंजन द्विवेदी की लगातार अनदेखी की गई। जबकि इस पद के योग्य अधिकारीयों की रेस में सबसे आगे चल रहे थे लेकिन एक बार भी सरकार ने नाम पर कोई विचार नहीं किया।

जबकि 4 आईपीएस अफसर डीजी मलय कुमार सिन्हा, डीजी राजीव राय भटनागर, डीजी रजनीकांत मिश्रा और डीजी ओम प्रकाश सिंह केंद्र सरकार में डेपुटेशन पर हैं। डीजी जावीद को मा० सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार में दिए गए निर्णय-“प्रदेश के डीजीपी को राज्य सरकार द्वारा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा नामित तीन वरिष्ठतम आईपीएस अफसरों में से उसकी सेवा अवधि, उनके बहुत अच्छे रिकॉर्ड और अनुभव के विस्तार के आधार पर पुलिस फ़ोर्स के नेतृत्व हेतु चयनित किया जाएगा।

" मा० कोर्ट ने कहा था कि इन आदेशों का प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा निश्चित रूप से पालन किया जायेगा। मेरा व्यक्तिगत मत है कि जब भी देश के स्थापित विधि का उल्लंघन होता है, इसके गलत सन्देश जाते हैं और यह ख़राब उदहारण प्रस्तुत करता है, जिसके कारण लोग “एक हाथ लो, दूसरे हाथ दो” की चर्चा स्वतः ही करने लगते हैं।

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