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जालिम सरकारों के आगे हार गया जालिम, कर ली आत्महत्या

 Special News Coverage |  20 April 2016 12:58 PM GMT


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हमीरपुर
बुंदेलखंड में सूखे की मार झेल रहे किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रही। अब तक बीते 15 दिन के भीतर ये चौथी आत्महत्या है। हमीरपुर जिले में एक और किसान ने खेत में लगे पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। किसान परिवार पर साहूकारों सहित बैंक का तीन लाख से ज्यादा का कर्ज था।

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हमीरपुर के बिदोखर के रहने वाले जालिम प्रजापति ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा की उसे भी बुंदेलखंड के अन्य किसानों की तरह ही आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त करनी पड़ेगी। लेकिन शायद नीयती को यही मंजूर था। लगातार सूखा और बेमौसम बरसात ने जालिम की फसलों को बर्बाद करना शुरू कर दिया। गांव के साहूकारों और बैंक के कर्ज तले दबे जालिम के परिवार के सामने आने वाले समय में खाने तक के लाले पड़ने वाले थे, लेकिन ये दिन देखने से पहले ही जालिम ने अपनी जिंदगी ख़त्म करने का फैसला कर लिया और खेत में लगे पेड़ से लटक कर जान दे दी।


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हालांकि सूबे की अखिलेश सरकार ने पूरे प्रदेश में भुखमरी से कोई ना मरे, इसलिए राहत पैकेट योजना का भी शुभारम्भ कर दिया। साथ ही किसी भी किसान की मौत होने पर जिले के जिलाधिकारी को मौके पर जाने का फरमान जारी किया है, लेकिन किसान को राहत पैकेट मिलना तो दूर किसान के मरने के बाद जिले के हुक्मरानों को जालिम की खबर लेने तक समय नहीं मिला।

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आखिर हार गया जालिम
जालिम के 70 साल के बूढ़े पिता रामसेवक के पास 35 बीघे खेती की जमीन थी। जालिम अपने पिता का बड़ा बेटा था, लिहाजा खेती बाड़ी की जिम्मेदारी जालिम पर ही थी। जालिम और छोटा भाई सुरेंद्र के परिवार के भरण पोषण का खेती ही मात्र एक जरिया था। पूरी खेती पिता रामसेवक के नाम थी, इसलिए बैंक का कर्ज भी पिता के नाम था। लेकिन गांव के साहूकारों का ढाई लाख का कर्ज और बैंक का अस्सी हजार का कर्ज अदा करने की जिम्मेदारी भी जालिम की थी।

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जालिम को एक बेटा और चार बेटियां हैं। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। दूसरी की होने वाली थी। इसकी चिंता भी जालिम को सता रही थी। खेती में कुछ फायदा हुआ नहीं, इसको लेकर जालिम परेशान रहने लगा। बुधवार को खेत में कटी हुई फसल देखने गया और वहीँ पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर झूल गया।

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