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उत्कृष्ट कार्य के लिए,उत्कृष्ट सम्मान,यश भारती सम्मान

 Special News Coverage |  23 March 2016 2:57 AM GMT


लखनऊ पं०सत्यम् मिश्रा
उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में,अखिलेश सरकार ने डॉ० भीमराव अम्बेडकर सभागार,डॉ०राम मनोहर लोहिया विश्व् बिद्यालय में एक अतिविशिष्ट कार्यक्रम यश भारती सम्मान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर अरुण कुमार कोरी मौजूद थी,जो कि राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)संस्कृति विभाग उत्तरप्रदेश हैं।


पहले आपको अवगत करा दूँ क़ि क्या है यह यश भारती सम्मान,इस यश भारती सम्मान कि शुरुआत 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के द्वारा शुरू किया गया था। ताकि राज्य की संस्कृति, कलाँ, साहित्य,नृत्य को बढ़ावा मिल सके और देश-विदेश में राज्य की संस्कृति का यश गान हों सके आपको ज्ञातव्य हों की शुरुआति दौर में इस सम्मान में 5 लाख की धनराशि के साथ एक प्रमाण पत्र सरकार के तरफ से भेंट की जाती थी। पर अब यह धनराशि बढ़ा कर 11 लाख कर दी गयी है।


प्रदेश में हुए इस पुरस्कार समारोह में 46 विभूतियों को यश भारती सम्मान से नवाजा गया।सम्मानित महानुभावो को 11 लाख की धनराशि के साथ एक प्रमाण पत्र सरकार की तरफ से दिया गया,और यही नहीं इसके साथ ही साथ आजीवन भर 50 हज़ार रूपये की पेंशन भी मिलेगी।



जिन 46 विभूतियों को यह सम्मान मिला उनमे से कुछ नाम निम्नलिखित हैं:
अभिनय:दिनेश लाल निरहुआ,(हास्य कलाकार)राजू श्रीवास्तव,(गायन)उस्ताद गुलाम मुस्तफ़ा, अंकित तिवारी,कमाल श्रीवास्तव),(लोकगीत)अहमद सिद्दीकी),(शिक्षा)प्रो०इमरान, नवाज़ देवबंदी पत्रकारिता)हेमन्त,मधुकर त्रिवेदी),(कत्थक)कुमकुम आदर्श,(चित्रकारी)सलीम
(फिल्मी दुनिया से)अनुराग कश्यप,सुधीर मिश्रा और विशाल भारद्वाज,(क्रिकेट)आर०पी०सिंह,(मेडिकल)डॉ०रमेश,डॉ०प्रभाकर,इसके अलांवा

शतरंज,घुड़सवारी,खेल और कुश्ती में अपना पराक्रम दिखाने वाले महान विभूतियों को यश भारती सम्मान से नवाजा गया।

सम्मानित किये लोगों का कार्य निश्चित रूप से उत्कृष्ट रहा होगा इसमें शक की कोई गुंजाइश ही नहीं है। लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि 50 हज़ार रूपये पेंशन के रूप में आजीवन देना कहाँ तक उचित है। ये जानते हुए कि प्रदेश के किसानों के खेत में सूखा पड़ा हुआ है और वे आत्महत्या कर रहे हैं और धरना दे रहे हैं।


आपको स्मरण होगा कि कुछ माह पूर्व किसानों के साथ भद्दा मज़ाक प्रकृति द्वारा और मौजूदा सरकार द्वारा किया गया था,जिसमें उन्हें भत्ते के रूप में 20,50 और 100,250 रुपये दिया गया था और प्रदेश में व्यापक स्तर पर इस कार्य की आलोचना हुई थी । यही पेंशन यदि पीड़ित किसानों को मिली होती तो यह ज़्यादा लाभदायक एवं फलित होता।लाखों और करोड़ों रूपये पुराष्करो के रूप में बाटना कहाँ तक जायज हैं,इसपे मौजूदा सरकार को अपने सलाहकारो से विचार विमर्श करना चाहिए।

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