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सरकारी विज्ञापनों में सपा सुप्रीमो मुलायम, शिवपाल की फोटो की याचिका ख़ारिज

 Special News Coverage |  25 April 2016 8:17 AM GMT

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लखनऊ
सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज संस्था द्वारा सरकारी विज्ञापनों में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह और उनके भाई शिवपाल सिंह की फोटो छापे जाने के सम्बन्ध में दायर याचिका में आज इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने वादी से सुप्रीम कोर्ट में अवमानना पीआईएल दायर करने को कहा।

जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस अताउ रहमान मसूदी की बेंच ने संस्था की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर की बहस सुनने के बाद आदेश दिया कि जो तथ्य याचिका में दर्शाए गए हैं, वे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना प्रतीत होते हैं, अतः प्रकरण में याची के लिए उचित होगा कि वह सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करे।


नूतन के अनुसार याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई 2015 को एक पीआईएल में आदेशित किया था कि किसी भी सरकारी विज्ञापन में केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की फोटो छप सकती है, जिसे 18 मार्च 2016 को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री और उनकी अनुपस्थिति में मंत्री की फोटो को भी अनुमति दे दी गयी। इसके विपरीत यूपी में पिछले एक महीने से सरकारी विज्ञापनों में मुलायम सिंह की फोटो छप रही है और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके कैबिनेट मंत्री शिवपाल की एक साथ फोटो छप रही है जो सीधे-सीधे सुप्रेम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।

अतः याचिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना को तत्काल रोके जाने और ऐसे करने वालों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्यवाही करते हुए इस फोटो का पैसा उनसे निजी रूप से वसूले जाने की प्रार्थना की गयी थी।

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