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छात्रों के दो गुटों मे फिर मारपीट, बााइक फूंकी

 Special News Coverage |  6 Oct 2015 5:43 AM GMT

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चंदौली (मुकेश मौर्या) : लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव को लेकर नामांकन पत्र वितरण की तिथि से ही छात्रों का दो गुट आमने-सामने है। किसी न किसी बात पर एक दूसरे को भिड़ने को हमेशा तैयार हैं दोनों गुट। सोमवार की रात मानस नगर में दोनों गुट आपस में भिड़ गए। मारपीट के बाद एक गुट के छात्र अपनी बाइक छोड़ फरार हो गए। दूसरे गुट के छात्रों ने वहां छूटी एक बाइक को आग के हवाले कर दिया जबकि तीन अन्य बाइक को ईंट-पत्थरों से कूंच क्षतिग्रस्त कर दिया। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई।


दरअसल दोनों गुट के पीछे समाजवादी पार्टी के ही दो युवा नेता हैं। इन्हीं दोनों नेताओं के प्रश्रय पर दोनों गुट के छात्र आमने-सामने हैं। सूत्रों के अनुसार सोमवार को एक गुट के एक नेता की पिटाई के लिए योजनाबद्ध तरीके से कुछ युवा मानस नगर पहुंचे। इस बात की जानकारी पहले से ही दूसरे गुट को थी। वे लोग लाठी डंडा व हाकी लेकर पहले से मुस्तैद थे। पहले गुट के छात्र जैसे ही वहां पहुंचे दूसरे गुट ने हमला कर दिया।

इसके बाद तो अफरा-तफरी मची और पहले गुट के छात्र अपनी बाइक छोड़कर इधर उधर भागे। दूसरे गुट के कुछ छात्र उनके पीछे भागे और कुछ एक बाइक में आग लगा दी। कुछ ने वहां छूटी तीन बाइकों को क्षतिग्रस्त कर दिया। छात्रों के इस संघर्ष से पूरा मानस कालोनी सहम उठा। किसी ने सौ नंबर पर डायल कर पुलिस को को इसकी सूचना दी।

थोड़ी देर में अलीनगर एसओ मयफोर्स वहां आ गए। पुलिस के आने से पहले ही दोनों गुट के छात्र वहां से फरार हो चुके थे। इस संबंध में थानाध्यक्ष विनोद यादव ने बताया कि यह छात्रों को आपसी गुट संघर्ष है। जो वाहन छूटे हैं उनके नंबरों से उनके मालिक की पहचान की जा रही है। कौन कौन से छात्र इसमें संलिप्त थे उनकी भी तलाश की जा रही है। शीघ्र ही दोनों गुट सामने आए जाएंगे।



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चुनाव तो स्थगित हो गया पर जारी है गुट संघर्ष छात्रों का गुट संघर्ष और उसके बाद उनका आंदोलन दो अक्टूबर को पूरा नगर देखा। नामांकन फार्म वितरण के दिन के ही आपसी गुट संघर्ष और उसके बाद ही भयावह स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव स्थगित कर दिया और पंचायत चुनाव के बाद कराने का निर्णय लिया। चुनाव तो स्थगित हो गया पर छात्रों का गुट संघर्ष अभी भी कायम है। कई बार आपस में भिड़ चुके हैं ये लोग।

सूत्रों की माने तो दोनों गुटों में कुछ छात्रों को टारगेट कर रखा है, जिनकी मौका मिलते ही धुनाई करना उनका लक्ष्य है।

आखिर क्यों चुप हैं सपा के बड़े नेता

सबसे हास्यास्पद स्थिति यह है कि छात्रों का दोनों गुट समाजवादी पार्टी से जुड़ा हुआ है। दोनों गुटों को प्रश्रय देने वाले नेता भी सपा के ही दो अलग-अलग संगठन से जुड़े हैं। सोचनीय प्रश्न यह है कि नगर में यह सब इन दिनों चल रहा है और सपा के बड़े नेता मौन साधे हुए हैं। आखिर दोनों गुटों को प्रश्रय देने वाले नेताओं को बैठाकर समझाने का काम ये बड़े नेता क्यों नहीं कर रहे हैं। इस तरह का गुट संघर्ष किसी बड़ी अनहोनी को न जन्म दे दे।

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