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इकबाल के सियासी इकबाल को नही पचा पा रहे विरोधी

 Special News Coverage |  2 Jan 2016 3:01 PM GMT

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सहारनपुर (दिनेश मौर्य)ः उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय प्राधिकारी क्षेत्र से निर्वाचित होने वाले विधान परिषद सदस्यों के चुनाव में हालांकि अभी काफी समय शेष है, परन्तु दमदार एवं प्रभावशाली उम्मीदवारों की घेराबंदी उनके सियासी प्रतिद्ववन्दियों द्वारा शुरू कर दी गयी है। बहुजन समाज पार्टी से विधान परिषद सदस्य हाजी मौ. इकबाल को लेकर मौजूदा समय में सियासी गलियारों मे जो चर्चाएं बनी हुई हैं उनके मुताबिक सियासी विरोधी विपक्षी पार्टियों के इशारे पर सुनयोजित ढंग से हाजी मौ. इकबाल के खिलाफ घेराबंदी करने मे लगे है।



न केवल जनपद सहारनपुर बल्कि उत्तर भारत को ग्लोकल यूनिवर्सिटी के नाम से प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था देने का काम करने वाले बसपा नेता एवं एमएलसी हाजी मौ. इकबाल की बढती सियासी ताकत व लोकप्रियता से विरोधी पिछले काफी समय से बौखलाहट महसूस कर रहे थे। पिछले दिनों सम्पन्न हुए जिला पंचायत के चुनाव में एमएलसी हाजी मौ. इकबाल के भाई महमूद एमडी की पत्नि शमीम राणा का जिला पंचायत सदस्य तथा मिर्जापुर ग्राम पंचायत के लिये एमएलसी सी पुत्रवधु का ग्राम प्रधान पद पर चुनाव जीतना सियासी विरोधियों में बेचेनी पैदा करने वाला रहा। नतीजतन सियासी विरोधियों ने सुनयोजित षडयंत्र के तहत हाजी मौ. इकबाल को खनन के कारोबार से जोडकर इन पर कई गम्भीर आरोप लगाये जबकि सच्चाई यह है कि खनन विभाग द्वारा जनपद में आवंटित खनन का कोई भी पट्टा एमएलसी हाजी मौ. इकबाल के नाम पर नही है।



पिछले दिनों हाजी मौ. इकबाल पर अपूत सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप से सम्बद्ध रणवीर सिंह नामक एक व्यक्ति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में भी दाखिल की गयी, जिसका संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायधीश जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने याचिकाकर्ता को शपथ पत्र देकर हाजी इकबाल के खिलाफ लगाये गये आरोपों की सम्पूर्ण जानकारी देने की हिदायत दी थी। इतना ही नही सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा है कि प्रकरण में लगता है कि दोनों के बीच वर्चस्व की लडाई चल रही है जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गयी है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता के आरोपों को लेकर हाजी मौ. इकबाल के अधिवक्ता ने पीठ के समक्ष कहा कि याचिकाकर्ता सिंह की ऐसी ही कई याचिकाओं को इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है। माननीय सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को लेकर क्या निर्णय आता है यह समय के गर्भ में छिपा है परन्तु सियासी गलियारों में चर्चा है कि सियासी विरोधी एमएलसी हाजी मौ. इकबाल के सियासी इकबाल को कम करने के लिये पूरी ताकत लगाये हुए है, परन्तु गरीब मजलूमों के दिलों में आज भी इकबाल की जनहितैषी छवि कायम है।

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