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उत्तराखंड: कांग्रेस के बागी विधायकों पर सुनवाई 25 अप्रैल तक टली

 Special News Coverage |  23 April 2016 1:16 PM GMT

उत्तराखंड: कांग्रेस के बागी विधायकों पर सुनवाई 25 अप्रैल तक टली
नैनीताल: कांग्रेस के बागी विधायकों की सदस्यता के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सुनवाई 25 अप्रैल तक टाल दी है। बागी विधायकों के अधिवक्ता ने बहस के लिए 25 अप्रैल तक का वक्त देने की मांग की साथ ही सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देने का हवाला दिया। स्पीकर की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि बागियों की याचिका को ही खारिज कर दिया जाना चाहिए। क्योंकि बागी नहीं चाहते कि हाईकोर्ट में सुनवाई हो। इसलिए वे मामले को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।


सिब्बल ने यह बात याचिकागणों के अधिवक्ता विकास बहुगुणा के आज मामले को सोमवार तक आगे बढ़ाने की मांग पर कड़ी आपत्ति जताते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह कोर्ट का अपमान है। उन्होंने कहा कि कोर्ट को ऐसे में पिटीशन को खारिज कर देना चाहिए। इस के बाद लगभग 2:15 बजे से उन्होंने 9 बर्खास्त विधायकों के खिलाफ स्पीकर की कारवाई के पक्ष में तर्क दिए। इस में गवर्नर को 18 मार्च को दिए नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट के लेटर पेड़ में राज्यपाल को दिए संयुक्त पत्र का हवाला दिया।

सिब्बल ने आरोप लगाया कि 9 विधायक 18 को सुबह से ही भाजपा के सरकार गिराने के षड्यंत्र में शामिल थे। उन्होंने सुप्रीमकोर्ट के फैसलों को आधार बनाते हुए स्पीकर की कार्रवाई को जायज ठहराया। सिब्बल ने राष्ट्रपति शासन को लेकर हाई कोर्ट के टिप्पणी, जिसमें पीठ ने इस कृत्य को राजनैतिक पाप कहा था की जानकारी दी। एकलपीठ ने सिब्बल की दलील के बाद सुनवाई के लिए सोमवार की तिथि तय कर दी।

याचिकागणों के अधिवक्ता को सुबह 11:15 बजे से सुरू होने वाली सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। एकलपीठ 27 अप्रैल से पहले फैसला दे सकती है। कांग्रेस के नौ बागी विधायकों में विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, अमृता रावत, प्रदीप बतरा, प्रणव सिंह, शैला रानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, सुबोध उनियाल और उमेश शर्मा के नाम शामिल हैं।

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