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आजकल आपके मोबाइल पर कोई कॉल आती है तो उसकी घण्टी कुछ कम देर तक बजती है, जानते हो क्यों?

 Special Coverage News |  8 Oct 2019 7:54 AM GMT  |  दिल्ली

आजकल आपके मोबाइल पर कोई कॉल आती है तो उसकी घण्टी कुछ कम देर तक बजती है, जानते हो क्यों?

गिरीश मालवीय

आपने शायद ध्यान दिया हो आजकल आपके मोबाइल पर कोई कॉल आती है तो उसकी घण्टी कुछ कम देर तक बजती है, पहले जितनी देर तक नही बजती, दरअसल एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने उनके नेटवर्क से बाहर जाने वाली कॉल पर घंटी बजने का समय घटाकर अब मात्र 25 सेकेंड कर दिया है। आमतौर पर कॉल आने के समय बजने वाली फोन की घंटी की अवधि 40 से 45 सेकंड होती है।

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पिछले साल ट्राई ने इंटर कनेक्ट चार्जेस में भारी कमी कर दी थी, इंटरकनेक्ट उपयोग शुल्क किसी एक नेटवर्क को दूसरे नेटवर्क द्वारा दी जाने वाली सेवाओं पर दिया जाता है। इसमें जिस नेटवर्क से कॉल की जाती है वह कॉल पहुंचने वाले नेटवर्क को यह शुल्क अदा करता है। अभी इसकी दर छह पैसा प्रति मिनट है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार ऑपरेटरों को जबरदस्त झटका देते हुए इंटरकनेक्ट यूजेज चार्ज (आईयूसी) की दरें 58 फीसदी घटा दी थी अगर कोई ऑपरेटर का ग्राहक दूसरे ऑपरेटर के नेटवर्क पर कॉल करेगा तो उसे इस नेटवर्क के इस्तेमाल के एवज में प्रति मिनट छह पैसे का आईयूसी होगा. पहले यह दर 14 पैसे थी.

दरअसल यह रिलायंस जिओ के लिए सबसे ज्यादा फायदे का सौदा बताया गया था लेकिन इससे एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया जैसे मौजूदा ऑपरेटरों के मुनाफे पर इससे बड़ी चोट पुहंची इन ऑपरेटरों के राजस्व का एक हिस्सा आईयूसी से आता है. वे ट्राई से मांग कर रहे थे कि इसे बढ़ाकर 30 पैसे कर दिया जाए. लेकिन इसे बढ़ाने के बजाए ट्राई ने इसे कम कर दिया.

6 पैसे प्रति मिनट की IUC के साथ भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आईडिया सेल्यूलर को मिला कर 4000 से 5000 करोड़ रुपये का प्रति वर्ष नुकसान होगा ओर 2020 से इसे जीरो IUC करने की बात की जा रही है इससे इन कम्पनियों को यह घाटा बढ़ कर 6000 करोड़ प्रति वर्ष हो जाएगा.

इसलिए इन कम्पनियों ने घण्टी बजने वाला टाइमिंग ही कम करने इससे होगा यह कि यदि उपभोक्ता 25 सेकंड में कॉल नही उठाता तो वह तुरन्त दूसरे नेटवर्क के उस उपभोक्ता को कॉल करेगा जिससे इन्हें प्रॉफिट होगा.

एयरटेल ने अपने पत्र में कहा, '' यद्यपि हमने महसूस किया कि इससे ग्राहकों को परेशानी हो सकती है लेकिन ट्राई की ओर से कोई निर्देश नहीं होने और इंटरकनेक्ट शुल्क के घाटे से बचने के लिए हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा है। इसलिए हमने हमारे नेटवर्क पर फोन की घंटी बजने की अवधि को घटाने का निर्णय किया है।''

एयरटेल ने जियो के इस कदम के प्रभाव के बारे में बार-बार ट्राई को बताया है। कंपनी का कहना है कि फोन की घंटी बजने की अवधि कम करने से मिस्ड कॉल की संख्या बढ़ेगी। इससे किसी व्यक्ति को कॉल लगाने और साथ ही मिस्ड कॉल देखने के बाद वापस कॉल करने की संख्या भी बढ़ेगी। इससे ग्राहकों के अनुभव के साथ-साथ नेटवर्क की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि टेलीकॉम कम्पनियां अब इस मामले में रेगुलेटरी ट्राई की अधिकारिता से ही इनकार कर रही है, दरअसल टेलीकॉम कम्पनियों की बढ़ती हुई प्रतिद्वंदिता अब अगले दौर में प्रवेश कर चुकी है इस गलाकाट स्पर्धा में सबसे बड़ा नुकसान ग्राहक ही झेलना को होगा.

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