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मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी, अब मिडिल क्लास लोग भी करेंगे हवाई यात्रा

 Special News Coverage |  2 Oct 2015 5:07 AM GMT


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नई दिल्लीः केंद्र सरकार हवाई किराए को रेल किराए के बराबर करने का प्लान बना रही है। इसके लिए छोटे शहरों के एयरपोर्ट को इस्तेमाल करने का प्लान है। सरकार की कोशिश है कि एक घंटे के हवाई सफर का किराया 2000 से 2500 रुपए के बीच हो। हालांकि एक्सपर्ट्स को यह काम मुश्किल लग रहा है।

30 करोड़ लोगों पर नजर
एविएशन मिनिस्ट्री में राज्यमंत्री महेश शर्मा के मुताबिक, “हमारे देश में 30 करोड़ मिडल क्लास लोग ऐसे हैं जो जिंदगी में कम से कम एक बार हवाई सफर करना चाहते हैं। अगर हम हवाई किराया 2500 रुपए (एक घंटे की फ्लाइट के लिए) करने में कामयाब हो जाते हैं तो उनका यह सपना पूरा हो सकता है।” लेकिन यह फ्लाइट्स छोटे शहरों के बीच ही होंगी। देश में करीब 31 एयरपोर्ट्स ऐसे हैं जहां पैसेंजर की कमी की वजह से या तो फ्लाइट्स ऑपरेशन बंद हो गए हैं या शुरू ही नहीं हो पाए हैं। ये एयरपोर्ट्स ज्यादातर छोटे शहरों में ही हैं।


क्या करना चाहती है सरकार
सरकार की नजर इन्हीं 31 एयरपोर्ट्स पर है। शर्मा के मुताबिक, “हम एयरपोर्ट चार्जेस को कम कर सकते हैं। हम राज्यों से वैट और दूसरे टैक्सों में कमी करने को कह सकते हैं। इसके अलावा एयरलाइंस कंपनीज से भी किराया कम करने को कहा जा सकता है।”



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कब और कैसे होगा
अगर इस प्रपोजल को लेकर सहमति बनती है तो अगले साल अप्रैल से इसे लागू किया जा सकता है। इसके लिए एयरलाइंस कंपनियों से रूट्स के लिए बोली लगाने को कहा जाएगा। ये रूट्स छोटे शहरों को बड़े शहरों से जोड़ेंगे। किराया 2000 रुपए से 2500 रुपए के बीच रखा जाएगा।

सरकार क्या करेगी
टिकट की एक्चुअल कॉस्ट और किराए के बीच का अंतर सरकार देगी। ये पैसा सरकार उन पैसेंजर्स से वसूल करेगी जो फायदेवाले रूट्स पर ट्रैवल करते हैं। इन पैसेंजर्स पर 2 फीसदी ‘सेस’ लगाया जाएगा। टेक्नीकली इसे वैलेडिटी गैप फंडिंग कहा जाता है।


लेकिन एयरलाइन कंपनियों को परेशानी
एयरलाइन कंपनियां सरकार का फाइनल प्रपोजल देखे बिना कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं। लेकिन कुछ एविएशन एक्सपर्ट इसे मुश्किल काम मान रहे हैं। उनका कहना है कि फ्यूल एफिशिएंट स्माल एयक्राफ्ट्स न होने की वजह से इस काम को करना कठिन होगा।

इनका कहना है
एशिया पैसेफिक एविएशन कंपनी के इंडियन यूनिट हैड कपिल कौल का कहना है, “डेफिनेशन के मुताबिक रीजनल सर्विस का मतलब यह है कि हम 50 सीटर प्लेन चलाएं। सरकार का प्लान पैसेंजर सर्विस शुरू करना है। लेकिन इस तरह की सर्विस शुरू करने के लिए प्लेन नहीं हैं। 9 से 30 सीटों वाले प्लेन अब आउटडेटेड हो चुके हैं। अगर हैं भी तो इनमें कम से कम 30 साल पुरानी टेक्नोलॉजी का यूज किया गया है।” कौल का इशारा प्लेन के सेफ्टी मेजर्स की तरफ है।

साभार दैनिक भास्कर



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