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इसरो ने रॉकेट तकनीक से तैयार किया 'दिल' कीमत होगी सवा लाख रुपये

 Special News Coverage |  19 April 2016 12:11 PM GMT

इसरो ने रॉकेट तकनीक से तैयार किया 'दिल' कीमत होगी सवा लाख रुपये

नई दिल्ली: इसरो के वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी, उन्होंने रॉकेट तकनीक का इस्तेमाल कर नकली दिल तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। हालांकि इस तकनीक का प्रयोग अभी जानवरों पर ही हुआ है, लेकिन अब वह दिन दूर नहीं, जब यह मशीन इंसान के भी काम आ सकेगी और जब यह इंसानों में धडकने लगेगा।

आपको बता दें अभी इसका प्रयोग एक सुअर पर किया गया है। यह सुअर इसरो द्वारा विकसित रॉकेट टेक्नोलॉजी से ज़िंदा है। डॉक्टरों की एक टीम ने इस सुअर के भीतर एक कंपैक्ट पंप लगाया जो दिल के उस हिस्से की तरह काम करता है, जो खून को पंप करता है। तिरुवनंतपुरम के एक अस्पताल में पांच सुअरों पर छह घंटे इसका परीक्षण चला। प्रयोग कामयाब रहा। ये छोटा-सा उपकरण इंसानों के लिए भी मददगार हो सकता है।


रॉकेट तकनीक से तैयार किया दिल
किसी रॉकेट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और तकनीक ही इस उपकरण में लगी है, जिसे लेफ्ट वेंट्रिकल एसिस्ट डिवाइस कहते हैं। यह हार्ट के ट्रांसप्लांटेशन में उपयोगी है। इसे सुअर पर टेस्ट किया गया। वह ठीक है और उसके बाकी के अंग ठीक हैं। इससे पता चलता है कि यह कृत्रिम हृदय के लिए बहुत अच्छा विकल्प है। यह पंप ऐसे टिटैनियम अलाय से बना है जो बायोकंपैटिएबल है। यानी जीवों की ज़रूरत के हिसाब से ढल सकता है। इसका वजन 100 ग्राम है। यह एक इलेक्ट्रिक पंप के जरिए एक मिनट में 3 से पांच किलोमीटर खून तक पंप कर सकता है।

कीमत होगी सवा लाख रुपये
यह इस बात की मिसाल है कि रॉकेट टेक्नोलॉजी के लिए किया जाने वाला काम किस तरह इंसानों की मदद कर सकता है। अगर हृदय काम करना बंद कर दे तो यह उसका विकल्प हो सकता है। यह एक बाइपास पंपिंग सिस्टम मुहैया कराता है। बता दें आज ऐसे हार्ट पंप करोडों रुपयों में मिलते हैं, लेकिन इसरो का यह पंप बस सवा लाख का है।

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