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आखिर अग्निशमन अधिकारी अमन शर्मा किसके चहेते हो जो इनका कई साल से नहीं हो रहा नोएडा से ट्रांसफर, जबकि कर चुके करोंड़ों के वारे न्यारे!

 Special Coverage News |  5 Nov 2019 6:15 AM GMT  |  नोएडा

आखिर अग्निशमन अधिकारी अमन शर्मा किसके चहेते हो जो इनका कई साल से नहीं हो रहा नोएडा से ट्रांसफर, जबकि कर चुके करोंड़ों के वारे न्यारे!

प्रदीप कुमार रावत

आगरा। मैं हूँ डॉन, मैं हूँ डॉन, हाँ मैं हूँ डॉन...! बेशक यह पंक्तियां बॉलीवुड की एक मशहूर फ़िल्म की हों, लेकिन उत्तर प्रदेश में इन्हें साकार कर रहे हैं यूपी फायर सर्विस के एक उप निदेशक। जो पिछले लगभग दो दशकों से विभाग के "डॉन" की भूमिका में हैं। उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग में एक अधिकारी के अलावा कोई अन्य योग्य ही नहीं है। अगर इनके संबंध में जन सूचना अधिकार के माध्यम से सूचना मांगी भी जाती है तो वह उपलब्ध नहीं कराई जाती,चाहे इसके लिए महकमे को सूचना आयुक्त के समक्ष शर्मसार ही क्यों न होना पड़े।

सूबे का उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग एक महत्वपूर्ण महकमा है, जो कि जनता से सीधे संपर्क में रहता है। इस विभाग के कर्मचारी और अधिकारी अपनी जान को दांव पर लगाकर आग की वीभत्स घटनाओं पर क़ाबू पाने का हर संभव प्रयास ही नहीं करते बल्कि जन हानि न हो इसके लिए अपनी जान भी दांव पर लगा देते हैं। वहीं दूसरी तरफ अग्निशमन महकमे में उप निदेशक अमन शर्मा जैसे अधिकारी भी मौजूद हैं जो सिर्फ अपने ऊँची पहुँच एवं संबंधों के चलते यूपी के क्रीमी शहरों में अपना स्थानान्तरण करा फायर विभाग में डॉन बने रहे।

वर्तमान में उप निदेशक अमन शर्मा मेरठ के उप निदेशक का कार्यभार है, साथ ही उत्तर प्रदेश के अन्य मंडलों के उप निदेशकों का अतिरिक्त प्रभार भी उप निदेशक अमन शर्मा के पास ही है।। यह इनका प्रभाव ही है कि उ.प्र.फायर विभाग में अन्य उप निदेशकों के रहते अतिरिक्त कार्यभार इन्हीं के पास है,अब समझा जा सकता है कि इन्हें डॉन का तमगा यूँ ही नहीं..! ऐसा नहीं है कि उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग में सभी ऐसे ही अधिकारी हैं,यहां प्रमोट एवं सीधी भर्ती के दर्जनों अधिकारी हैं जो किसी भी मापदंड में कमतर नहीं।। यूपी फायर सर्विस में अमन शर्मा मुख्य अग्निशमन अधिकारी के पद पर रहे हों या उप निदेशक के पद पर रहे हों, इनका कार्यकाल जलवेदार रहा है। इनके बीच में जो भी आया उसको अपने अनुसार निबटा दिया गया। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में भी इतनी हिम्मत नहीं कि इनके कारनामों एवं दबंगई को शासन या सरकार के आला अधिकारियों को अवगत करा सकें।

उ.प्र.अग्निशमन विभाग में पिछले दो दशकों से एक अधिकारी का जलवा,इनका काटा पानी भी न मांगे
शासन व सरकार के आदेशों एवं निर्देशों का पालन करना गलत है तो मैं गलत हूँ- उप निदेशक
उप-निदेशक पिछले एक दशक से एनसीआर में अंगद की तरह पैर जमाये बैठे हैं

सूत्र बताते हैं कि अमन शर्मा बेशक मेरठ परिक्षेत्र के उप निदेशक हों लेकिन इनका कार्यालय नोएडा ही रहा है। उत्तर प्रदेश में नोएडा को "सोने का अंडा" देने वाली मुर्गी माना जाता है, इसलिए अमन शर्मा ने इसी क्षेत्र को अपनी कर्म भूमि बना लिया। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार रही हो या बहुजन समाज पार्टी की या फिर अब भाजपा की रही हो... इन्हें यहां से कोई हिला नहीं सका है। शासन के नियम कानून इनके समक्ष सब बौने हैं। जब मामला तूल पकड़ता है या शिकायत होती है तो सब ऊपर से मैनेज कर लिया जाता है, उप निदेशक कुछ समय के लिए लखनऊ में भी रहे लेकिन कुछ समय बाद वहीं सोने का अंडा देने वाले परिक्षेत्र में पहुँच कर जम गए। एक पखवाड़ा बीते इनका ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ,जिसमें उप निदेशक अमन शर्मा अपने अधीनस्थ अधिकारी को एनबीसी का ज्ञान पढ़ा रहे हैं। इत्तेफाक से अधीनस्थ अधिकारी , बी.ई.फायर नागपुर से हैं जो ऑडियो में भी हवाला दे रहे हैं।अमन शर्मा यही नहीं रुके बल्कि ऑडियो में अधीनस्थ अधिकारी को अनापत्ति प्रमाण पत्र की रिपोर्ट सकारात्मक देने हेतु कह रहे हैं साथ ही रिपोर्ट पॉज़िटिव न देने पर निलंबित करने की धमकी भी दे रहे हैं।

इस संबंध में अमन शर्मा, उप निदेशक मेरठ परिक्षेत्र,मेरठ का मिडिया से कहना है कि मेरा या अन्य किसी राजपत्रित अधिकारी का स्थानांतरण शासन करता है न कि उ. प्र.अग्निशमन विभाग। सरकार किसी भी अधिकारी को पूरे प्रदेश में जरूरत के अनुसार कभी भी कहीं भी भेज सकती है। मैं अगर किसी क्षेत्र विशेष में अधिक समय तक रहा हूँ तो सरकार ने मेरी विशेषज्ञता या सरकार ने अपनी जरूरत के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में तैनाती दी है। इस विषय में सिर्फ यही कह सकता हूँ कि यह सब शासन पर छोड़ देना चाहिए। यह तो बस लोगों ने मेरे बारे में भ्रांतियां बना ली है, जिसका कोई उपचार नहीं। मुझे तो बेवज़ह हर मामले में घसीटा जाता रहा है। ऑडियो क्लिप में भी यही हुआ। जबकि मैं साफ साफ कह रहा हूँ कि अगर आप नियमों का पालन नहीं करेंगे तो निलंबित होंगे। अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेशों की अवहेलना करना शासन के आदेशों की अवहेलना ही है। मुझे और विभाग को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जो कि पूर्व सुनियोजित तरीके से किया जा है। मेरी पोस्टिंग गाजियाबाद, मेरठ, आगरा,लखनऊ, मुरादाबाद या अन्य जनपदों में हुई है तो इसमें मेरी क्या भूमिका है? यह सब शासन करता है न कि किसी व्यक्ति विशेष को यह अधिकार है। फिर भी मुझे निशाना बनाया जा रहा है तो इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। मैं भी अन्य अधिकारियों की तरफ सरकार एवं शासन के आदेशों एवं निर्देशों का ही पालन कर रहा हूँ। अगर सरकार के आदेशों का पालन करना दबंगई करना है तो फिर इसका कोई समाधान नहीं।

इस मामले में प्रदेश के कई अधिकारियों ने नाम न उजागर करते की शर्त पर बताया कि यह बात सच है कि उप निदेशक का विभाग में कोई तोड़ नहीं, जहां वह चाहते हैं उन्हें वहीं पोस्टिंग मिलती है। उन्होंने कहा कि इनके सर्विस रेकॉर्ड को देखकर कोई भी बता देगा कि उप निदेशक ने सिर्फ और सिर्फ मलाईदार जनपदों में ही पोस्टिंग पाई है।। अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश अग्निशमन महकमे के "डॉन" आख़िर कब तक शासन की आँखों में धूल झौक फायर विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग के "डॉन" बने रहते हैं। इनके कारनामे के चलते नोएडा में एक फायर सर्विश अधिकारी रिश्वत लेने के मामले में जेल जा चूका है।

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