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काश आकाश कुलहरि छुट्टी न गये होते!

 Shiv Kumar Mishra |  12 Jan 2020 11:48 AM GMT  |  अलीगढ़

काश आकाश कुलहरि छुट्टी न गये होते!

नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुई पुलिस छात्र झड़प काफी हिंसक हो गई थी और छात्रों पर पुलिस ने खूंखार अपराधियों की तरह कार्रवाई की जिसमें कई छात्रों को गंभीर चोटें आई थी। अलीगढ़ की इस घटना के बाद जो बात सामने आई थी वो ये थी कि एक दिन पहले तक यूनिवर्सिटी में चल रहे प्रदर्शन में पुलिस छात्र संघर्ष की कोई संभावना नही देखी जा रहीं थी लेकिन अचानक अलीगढ़ पुलिस का रवैया इतना बर्बर कैसे हो गया। पूरे उत्तर प्रदेश में ही बहुत सी जगहों पर पुलिस ने एक समुदाय विशेष के खिलाफ जिस प्रकार कार्रवाई की थी उससे पुलिस छवि मुस्लिम विरोधी के रूप में उभरी थी। एनआरसी के विरुद्ध प्रदर्शन पूरे राज्य में हुए थे लेकिन कुछ जगहों पर हिंसा हुई और कुछ जगहों पर बिलकुल भी हिंसा नहीं हुई। इसका कारण जो सामने आया उसमें महत्वपूर्ण ये था कि जहाँ पुलिस अधिकारियों ने समझबूझ और समुदाय विशेष के प्रति सहानुभूति दिखाई वहाँ हिंसा नहीं हुई और जहाँ पुलिस अधिकारियों ने समझदारी से काम नहीं लिया वहाँ लोग भी मारे गए और पुलिस वालों के भी चोटें लगी।

अलीगढ़ चूंकि पहले से ही संवेदनशील ज़िला था और दिल्ली में जामिया मिल्लिया में हुए पुलिस तांडव से अलीगढ़ यूनिवर्सिटी का उबलना भी तय था और छात्रों ने यहाँ भी बड़े जोशिले अंदाज में प्रदर्शन किया। अलीगढ़ पुलिस प्रमुख आकाश कुलहरि ने स्थित को भांपते हुए छात्रों से सहानुभूति भी जताई और उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए कहा जिस पर विश्वविद्यालय के छात्रों समेत अलीगढ़ के मुस्लिम समुदाय ने पुलिस कप्तान की बात मानी। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आईपीएस अधिकारी अब्दुल हमीद भी अलीगढ़ पुलिस प्रमुख के बैच के हैं और दोनों में गहरी मित्रता भी है। आकाश कुलहरि ने स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखा। सूत्रों के मुताबिक जिस दिन अलीगढ़ में पुलिसिया तांडव हुआ उस दिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद अलीगढ़ से बाहर थे। दोनों आईपीएस अधिकारियों की गैर मौजूदगी में पुलिस ने एसएसपी की मेहनत पर पानी फेरते हुए छात्रों के विरुद्ध युद्ध छोड़ दिया। पुलिस कार्रवाई में बहुत सारे छात्रों को बहुत सा नुकसान उठाना पड़ा साथ ही यूनिवर्सिटी का नुकसान हुआ और अभी भी ये उम्मीद नहीं है कि यूनिवर्सिटी कब तक खुल पाएगी।

छात्रों और यूनिवर्सिटी के नुकसान के साथ साथ ही पुलिस की छवि को गहरा नुकसान हुआ और पुलिस की छवि पूरे राज्य में मुस्लिम दुश्मन सेना के रूप में उभरी है जिसका नुकसान पुलिस को ये हुआ कि मुसलमानों का विश्वास पुलिस से बिलकुल उठ चुका है। आज मुसलमानों से पूछिए कि तुम्हारा नंबर वन दुश्मन कौन है तो ज़बान पर पुलिस का नाम आएगा।

अलीगढ़ में घूमने पर मुस्लिम समुदाय के लोगों से बात करके पता चला कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि को समुदाय में काफी अच्छी नज़रों से देखा जाता है। एक बात और सामने आई है कि यदि उस दिन आकाश कुलहरि अलीगढ़ से बाहर न जाते तो परिस्थितियां खराब न होती।

हालांकि आकाश कुलहरि अब प्रोन्नत होकर डीआईजी बन चुके हैं लेकिन लोगो का मानना है कि सरकार को इन्हें अलीगढ़ का ही डीआईजी बना देना चाहिए शायद कुछ ज़ख्म भरे जा सकें।

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