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लखनऊ के बाद औरैया में पत्रकारों को जानवर की तरह पीटा गया, पुलिस अब पत्रकारों पर हुई हमलावर, देखें दर्दनाक वीडियो

लखनऊ के बाद औरैया में पुलिस के सामने पत्रकार जानवर की तरह पिटे.

 शिव कुमार मिश्र |  12 Jun 2018 4:39 PM GMT  |  औरैया

पत्रकारों की पिटाईपत्रकारों की पिटाई

औरैया में पत्रकारों पर हमला करने वाले हमलावरों के आगे पुलिस नतमस्तक हो गई. अभी बीते दिन लखनऊ में जनसंदेश के संपादक को सरेआम जलील किया गया ऐसा कोई भी शब्द बेइज्जत का नहीं था जो प्रयोग न किया गया हो और इन औरैया के पत्रकारों को तो इतनी बुरी तरह पीटा गया है जैसे ये जानवर हो. क्या हुआ है पुलिस को जो ऐसा व्यवहार पत्रकारों के खिलाफ कर रही है.


हमलावरों ने न्यूज नेशन के अश्वनी बाजपेई और चैनल वन न्यूज़ के पत्रकार अंजुमन तिवारी को पीटा, पीटने के बाद विडियो वायरल किया है. इन हमलावरों पर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. हमारा पूरा पत्रकार समाज चुप बैठा देख रहा है आज ये पिटा है में नहीं पिटा. कल आप भी पीटेंगे और कोई नहीं बोलेगा.
पीड़ित पत्रकारों के अनुसार औरैया बीजेपी ज़िला अध्यक्ष और पुलिस के इशारे पर किया गया हमला, लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को खत्म करने की साजिश की जा रही है. वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि इन गुंडों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया जा सके.
पीड़ित पत्रकार अश्वनी बाजपेई - 8923411586
पीड़ित पत्रकार अंजुमन तिवारी - ८५३२८५८६६८



क्या था मामला

अगर आप खुद को पत्रकार मानते हैं.. तो ये वीडियो देखने के बाद आपका खून ज़रूर उबाल मारेगा। इससे संबंधित कहानी कुछ यूं है कि बीते शनिवार को औरेया जिले के 2 युवा पत्रकारों अश्वनी बाजपेयी (न्यूज़ नेशन/न्यूज़ स्टेट), अंजुमन तिवारी (चैनल वन) को पुलिस द्वारा ट्रकों से वसूली की जानकारी मिली..खबर बनाने के दौरान उन्होंने देखा कि देवकली चौकी प्रभारी मदन गुप्ता और उनके मातहत के संरक्षण में उक्त वसूली हो रही है। अचानक करीब आधा दर्जन गुंडे पहुंचकर दोनों पत्रकारों पर ये कहते हुए जानलेवा हमला कर देते हैं..कि और बनाओ पुलिस के खिलाफ ख़बर। हैरत है कि ये घटना देवकली पुलिस चौकी पर घटित हुई..घटना के बाद पीड़ित पत्रकार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं..मुकदमा तो छोडिए, उनका मेडिकल अभी तक पुलिस ने नहीं करवाया। ऐसे में समझा जा सकता है कि छोटे जिलों के पत्रकारों का किस तरह शोषण होता है। वीडियो आपके सामने है...देखने वालों पर निर्भर है कि इसे कौन 'मजा' के तौर पर देखेगा और कौन 'सजा' के तौर पर। सोचिएगा... आज ये हैं.. कल हमारा या आपका भी नंबर आएगा!


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