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अयोध्या मामले पर मायावती का बड़ा बयान, बोलीं- सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला दे, सब करें सम्मान

बसपा सुप्रीमो मायावती ने रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर बयान दिया है.

 Special Coverage News |  7 Oct 2019 2:13 PM GMT  |  दिल्ली

अयोध्या मामले पर मायावती का बड़ा बयान, बोलीं- सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला दे, सब करें सम्मान

बसपा सुप्रीमो मायावती ने रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर बयान दिया है. सोमवार को उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से जो भी फैसला आए उसका सभी को सम्मान करना चाहिए और देश में हर जगह साम्प्रदायिक सौहार्द का वातावरण कायम रखना चाहिए.

बसपा सुप्रीमो ने ट्वीट कर लिखा, 'माननीय सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ का बाबरी मस्जिद/ रामजन्म भूमि प्रकरण पर दिन-प्रतिदिन की सुनवाई के बाद आगे जो भी फैसला आए उसका सभी को अवश्य ही सम्मान करना चाहिए और देश में हर जगह साम्प्रदायिक सौहार्द का वातावरण कायम रखना चाहिए. यही व्यापक जनहित व देशहित में सर्वोत्तम होगा.'

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की बहस पूरी करने की नई समय सीमा तय की है. शीर्ष अदालत ने मामले के सभी पक्षकारों से कहा कि वो 17 अक्टूबर तक बहस पूरी कर लें. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बहस पूरी करने के लिए 18 अक्टूबर की तारीख तय की थी. अब बहस पूरी करने के लिए एक दिन कम कर दिया गया है. अब रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकारों को 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करनी होगी.


सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की बहस पूरी करने की नई समय सीमा तय की है. शीर्ष अदालत ने मामले के सभी पक्षकारों से कहा कि वो 17 अक्टूबर तक बहस पूरी कर लें. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बहस पूरी करने के लिए 18 अक्टूबर की तारीख तय की थी. अब बहस पूरी करने के लिए एक दिन कम कर दिया गया है. अब रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकारों को 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करनी होगी.

17 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं CJI

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली 5 न्यायमूर्तियों की संविधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है और चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. कार्यकाल खत्म होने के बाद रंजन गोगोई न तो मामले की सुनवाई कर पाएंगे और न ही फैसला सुना पाएंगे. लिहाजा वो चाहते हैं कि मामले पर फैसला उनके रिटायर होने से पहले ही हो जाए.

अब यहां सवाल यह उठ रहा है कि अगर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई लंबी खिंचती है, तो मामले पर फैसला कौन सुनाएगा? क्या इस मामले की सुनवाई करने और फैसला सुनाने के लिए रंजन गोगोई का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है?

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