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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में हो सकती है रुकावट, मुस्लिम पक्ष के वकील ने किया बड़ा दावा

पिछले साल 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाया था. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि को हिंदू पक्ष को देने और वहां भव्य राम मंदिर निर्माण करने का फैसला दिया था. जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या के बाहरी क्षेत्र में 5 एकड़ जमीन देने की बात कही थी

 Sujeet Kumar Gupta |  18 Feb 2020 8:02 AM GMT  |  नई दिल्ली

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में हो सकती है रुकावट, मुस्लिम पक्ष के वकील ने किया बड़ा दावा

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र लिखा गया है. ये पत्र स्थानीय निवासी हाजी मोहम्मद सहित 9 लोगों ने लिखा है. मुस्लिम पक्षकारों के वकील की ओर से ट्रस्ट को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने 67 एकड़ जमीन एक्ट के तहत ली थी जो अब ट्रस्ट को दे दी गई है, उसमें 4/5 एकड़ में कब्रगाह भी है.

अयोध्या के एक मुस्लिम निवासियों के समूह ने मंदिर ट्रस्ट को पत्र भेजते हुए कहा कि मुस्लिम के कब्रगाह पर राम मंदिर का बनाया जाना यह एक 'सनातन धर्म' का उल्लंघन होगा। अयोध्या जमीन विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील रहे एम.आर. शमशाद की तरफ से यह पत्र भेजा गया है। 15 फरवरी को भेजे गए पत्र में यह कहा गया है कि जिस जगह पर बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी वहां पर एक कब्रगाह है, जहां पर 1885 में अयोध्या में दंगा के दौरान उन लोगों को दफनाया गया था।

इस पत्र पर आगे कहा गया- "रिकॉर्डेट फैक्ट्स के मुताबिक, 1885 दंगे में 75 मुसलमानों की हत्या की गई और मस्जिद के बाद एक कब्रगाह है, जहां पर उन शवों को दफनाया गया। हालांकि, उसके बाद इस जमीन का इस्तेमाल कब्रगाह के तौर पर होता रहा है।" पत्र में कहा गया है- "केन्द्र सरकार ने भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिमों के कब्रगाह को कोई मुद्दा नहीं माना है। यह 'धर्म' का उल्लंघन है।"

यह पत्र सुप्रीम कोर्ट के वकील के. पराशरण और अन्य ट्रस्टी को संबोधित करते हुए लिखा गया है। पराशरण ट्रस्ट की अगुवाई कर रहे हैं। उनसे कहा गया है कि इस बात पर को देखें कि क्या राम मंदिर के लिए मुस्लिम कब्रगाह स्वीकार्य है।"

बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठन के ऐलान के बाद से ही हलचल तेज है. कई संगठन ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व न मिलने को लेकर नाराज हैं, तो कई नेता ब्राह्मण और दलित सदस्यों का हवाला देते हुए पिछड़ों को भी सदस्य बनाने की मांग को लेकर. इन सबके बीच अब निर्मोही अखाड़ा ने भी ट्रस्ट के स्वरूप पर आपत्ति जताते हुए ट्रस्ट से रामलला की सेवा और पूजा का अधिकार अक्षुण्ण बनाए रखने की गारंटी मांगी है.

अखाड़े के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा था कि निर्मोही अखाड़े के वैष्णव बैरागी सदियों से रामलला की सेवा करते रहे हैं. इसके लिए वैष्णव बैरागियों ने मुगलों और अंग्रेजों से लड़ाइयां लड़ीं और शहादतें भी दीं. उन्होंने कहा कि निर्मोही अखाड़ा 19 फरवरी को होने वाली श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक में अपनी बात पुरजोर तरीके से रखेगा।

बतादें कि पिछले साल 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाया था. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि को हिंदू पक्ष को देने और वहां भव्य राम मंदिर निर्माण करने का फैसला दिया था. जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या के बाहरी क्षेत्र में 5 एकड़ जमीन देने की बात कही थी. मोदी सरकार ने अब यूपी की योगी सरकार से आग्रह किया था कि वो मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने की व्यवस्था करे.

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