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आखिर नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद का किसके सर पर सजेगा ताज, चर्चा तेज हुई आज

राजीव शर्मा पर मनोज गोयल के भारी पड़ने के आसार प्रबल, या फिर किसी तीसरे की चमक सकती है किस्मत

 Shiv Kumar Mishra |  19 Jan 2020 4:13 AM GMT  |  गाजियाबाद

आखिर नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद का किसके सर पर सजेगा ताज, चर्चा तेज हुई आज

कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार

गाजियाबाद। नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद का ताज इस बार किसके सर पर सजेगा, इस बात की चर्चा आज नगर निगम परिसर में सरगर्मी पूर्वक होती रही। इसकी परिचर्चा का केंद्र विंदू बीजेपी का नेहरू नगर दफ्तर भी बना रहा। सबके समर्थक एक दूसरे का मन टटोलते रहे। इसी बात का असर है कि बीजेपी संगठन की भी सरगर्मी इस समसामयिक मसले पर तेज हो गई है। महानगर अध्यक्ष और महापौर पद पर ब्राह्मण वर्ग के नेता काबिज होने के चलते संगठन ने अपने निगम रणनीतिकारों को कुछ परोक्ष सुझाव दिए हैं, जिससे निगम की ब्राह्मण लॉबी में खलबली मच गई है।

इसके मद्देनजर पार्टी संगठन अब किसके नाम पर मुहर लगाएगा, इसको लेकर पार्टी गलियारों में भी चर्चा तेज हो चुकी है। इस बार खास बात यह है कि जिला व महानगर संगठन के फैसले पर लखनऊ और दिल्ली की बनिया लॉबी की भी नजर है, क्योंकि केंद्र में मोदी-शाह की सफल जोड़ी के बावजूद वैश्य सियासत का गढ़ समझे जाने वाले गाजियाबाद में इस वर्ग के राजनेता कई मोर्चे पर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और अपनी पीड़ा ऊपर तक साझा कर चुके हैं, जिससे इस बार कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद के लिए व्यक्तिविशेष का चुनाव अहम बन चुका है।

बताया गया है कि जनपद के लोकसभा सदस्य पद पर क्षत्रिय राजनेता जनरल वी के सिंह काबिज हैं जो मोदी सरकार में राज्यमंत्री भी हैं। जबकि राज्यसभा सदस्य पद पर वैश्य नेता डॉ अनिल अग्रवाल को तवज्जो दी गई है। नगर विधायक और यूपी के राज्यमंत्री अतुल गर्ग भी वैश्य विरादरी से आते हैं। यहां की महापौर आशा शर्मा और साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा ब्राह्मण वर्ग से आते हैं, जबकि मुरादनगर विधायक अजीतपाल त्यागी ब्राह्मण मूल से ही आते हैं। महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा भी ब्राह्मण ही हैं। वहीं, दर्जा प्राप्त मंत्री अशोक गोयल वैश्य वर्ग से हैं, तो एक अन्य दर्जा प्राप्त मंत्री बलदेव राज शर्मा ब्राह्मण वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। लोनी विधायक नन्दकिशोर गुर्जर गुर्जर जाति से हैं तो मोदीनगर विधायक डॉ मंजू सिवाच जाट विरादरी से। पार्टी जिलाध्यक्ष का पद एक वैश्य नेता बंसल के हवाले है। खोड़ा-मकनपुर नगरपालिका परिषद के चेयरमैन पद पर काबिज रीना भाटी गुर्जर विरादरी से हैं तो लोनी नगरपालिका परिषद की चेयरमैन रंजीता धामा भी गुर्जर विरादरी से ही हैं। वहीं, मुरादनगर नगरपालिका परिषद के चेयरमैन पद पर काबिज विकास चौधरी जाट विरादरी से आते हैं। लोगों का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी वैश्य हैं और सीएम योगी आदित्यनाथ क्षत्रिय। संघ प्रमुख मोहन भागवत ब्राह्मण हैं, जिससे ब्राह्मण भी खुद को ठगा महसूस नहीं करते हैं। पार्टी के अन्य पदों पर भी ब्राह्मण-बनिया-क्षत्रिय लॉबी की पकड़ मजबूत है और आपसी रस्साकशी भी। इसलिए नगर निगम उपाध्यक्ष पद पर किसकी किस्मत चमकेगी, कहना मुश्किल है। अभी तक याद पद यादव विरादरी के सुनील यादव के पास है, जिनका समय पूरा हो चुका है। इसलिए पिछड़ी जाति के कुछ अन्य नेता भी इस पर अपना स्वाभाविक दावा मानते हैं।

जानकारों का कहना है कि गाजियाबाद नगर निगम बीजेपी का गढ़ है। जब यूपी की सियासत में सपा-बसपा की तूती बोलती थी, तब भी निगम की सियासत पर भाजपा भारी पड़ती रही। यहां के 100 मौजूदा पार्षदों में 57 पार्षद बीजेपी के ही हैं। नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्यों में भी बीजेपी का पलड़ा भारी है। हाल ही में 6 कार्यकारिणी सदस्यों के लिए हुए चुनाव में अपने 4 सदस्यों को जिताने में बीजेपी कामयाब रही, जबकि एक पर बसपा और दूसरे पर कांग्रेस सफल रही। जबकि सपा चारो खाने चित्त हो गई। यही वजह है कि भाजपा संगठन नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद के लिए एक साल कार्यकाल वाला फॉर्मूला लागू करवा सकता है जिसमें निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का कार्यकाल एक वर्ष का ही रहेगा। इससे पार्टी संगठन को फायदा यह होगा कि वह अगले शेष 3 साल में अपने 3 नेताओं को बारी बारी से संतुष्ट कर सकेगा। समझा जाता है कि पार्टी संगठन अब उन निगम कार्यकारिणी सदस्य पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा जो निगम कार्यकारिणी में एक वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं और एक वर्ष का कार्यकाल बाकी है। यदि इस फॉर्मूले पर अमल हुआ तो फिर नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष बनने का मौका पुराने वाले 4 सदस्यों में से ही किसी एक को मिलेगा। इस रणनीति के मुताबिक, पार्टी संगठन द्वारा पहले ही यह प्रस्ताव पास होगा कि निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का कार्यकाल ही एक वर्ष का होगा।

बताया जाता है कि नगर निगम में कार्यकारिणी सदस्य का पद अहम माना जाता है, इसलिए उपाध्यक्ष बनने को लेकर सभी सदस्य अपनी अपनी जुगत पार्टी संगठन से बिठाते हैं। लेकिन इस बार निगम की सियासत में बीजेपी किसका पत्ता खोलेगी, इस बात पर वैश्यों की नजर इसलिए है कि महापौर आशा शर्मा ब्राह्मण तो हैं ही, इस बार कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद भी किसी ब्राह्मण नेता के पास ही जाने के आसार प्रबल हैं। चर्चा है कि महापौर के भाई व वरिष्ठ पार्षद अनिल स्वामी और बसपाई-सपाई से भाजपाई बने राजीव शर्मा इस पद के प्रबल दावेदार बनकर उभरे हैं, लेकिन महापौर के स्वजातीय होने की वजह से इनका पत्ता कभी भी कट भी सकता है। वैसी स्थिति में नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य मनोज गोयल की किस्मत का सितारा भी बुलंद हो सकता है, क्योंकि महापौर शर्मा निगम उपाध्यक्ष पद पर मनोज गोयल के बैठने से ज्यादा सुकून महसूस करेंगी, क्योंकि वह कार्यकारिणी सदस्य राजीव शर्मा की तरह ही काफी मुखर राजनेता हैं और सबको साधकर चलने वाले हैं। उनका प्लस पॉइंट यह भी यह है कि साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा व गाजियाबाद सांसद वी के सिंह के अलावा नगर विधायक अतुल गर्ग के भी काफी करीबी हैं, जिसका लाभ उन्हें मिल जाए तो किसी को हैरत नहीं होगी।

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