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कैसे किया पराजित बीजेपी के बड़े चेहरे मनोज सिन्हा को अफजाल अंसारी ने, जानिए पूरा हाल

कैसे किया पराजित बीजेपी के बड़े चेहरे मनोज सिन्हा को अफजाल अंसारी ने, जानिए पूरा हाल
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लोकसभा चुनाव में गाज़ीपुर की सीट से गठबंधन के बसपा उम्मीदवार अफजाल अंसारी ने जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है. उनकी इस जीत ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं. मुख़्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी की जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के सामने चुनाव लड़ा था.जीत ऐतिहासिक इसलिए भी हुई है क्योंकि उन्होंने करीब एक लाख बीस हजार वोटों से एकतरफा जीत हासिल की है. आप उनकी रिकॉर्ड जीत का अंदाजा इससे लगा सकते हैं की मनोज सिन्हा एक भी राउंड में अफजाल अंसारी से बढ़त नहीं बना पाए.

बीजेपी के कद्दावर नेता हैं मनोज सिन्हा

मनोज सिन्हा बीजेपी के कद्दावर नेता हैं. उनकी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री के पद के लिए सबसे ऊपर नाम उन्हीं का था. अंतिम समय में बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ पर मुहर लगाई। इतना ही नहीं बतौर केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने पूर्वांचल में काम कराने का खूब दावा किया था. लेकिन जिस तरह से जनता ने उनको नकारा है, अब उनके दावे पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.




अफजाल अंसारी की जीत की सफलता का राज

बहुजन समाज पार्टी जब अपने बुरे दौर से गुजर रही है तो यह चुनाव एक उम्मीद की किरण लेकर आया है. कुछ समय पहले जब एक एक कर कद्दावर नेता बसपा का साथ छोड़ रहे थे तो पूर्वांचल में पार्टी को खड़ा करने की जिम्मेदारी अंसारी परिवार ने ली. विधानसभा के चुनाव में मुख्तार अंसारी मऊ सदर से विधायक बने. उसके बाद उनके भाई अफजाल अंसारी, सिबगतुल्लाह अंसारी, बेटे अब्बास अंसारी ने एक एक कर पार्टी को खड़ा करने का काम किया। नगर निगम चुनाव में पहली बार सिंबल पर लड़ी बसपा को बड़ी सफलता भी दिलाई. तोहफे के रूप में मायावती ने भी अफजाल अंसारी को लोकसभा का टिकट थमाया और आज नतीजा सबके सामने है.

हार मिली लेकिन जनता के बीच में बने रहे

अफजाल अंसारी की ऐतिहासिक जीत के पीछे कई कारण हैं. इनमें सबसे बड़ा कारण है जनता के बीच बने रहना। दो विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में मनमाफिक सफलता नहीं मिलने के बावजूद अफजाल अंसारी और उनका परिवार कभी भी जनता से दूर नहीं गया. दरबार, नुक्कड़ सभाएं, लोगों के घर घर जाकर उनके सुख दुःख में शरीक होने का सिलसिला लगातार बना रहा. यही वो कारण था जिसे गाजीपुर की जनता कभी भुला नहीं पाई. क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर अंसारी परिवार हमेशा मुखर रहा है. हर जुल्म और गलत फैसलों का इन्होने विरोध किया. न्याय के लिए अपना सर्वस्व जनता को दिया.

अब्बास की लोकप्रियता ने तोड़े सारे बंधन

मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने हाल के दिनों में अपनी राजनितिक सूझबूझ से बसपा को ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं. यही कारण है की बसपा सुप्रीमों मायावती का स्नेह भी उन्हें लगातार मिलता है. अब्बास अंसारी ने युवाओं से लगातार संवाद बनाए रखा. उनके बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं और निराकरण भी करवाए. राजनीति की फील्ड के शानदार खिलाड़ी होनेके साथ साथ अब्बास अंतर्राष्ट्रीय निशानेबाज भी हैं. युवाओं का समर्थन उनकी ताकत बन चुका है.




वहीं अब्बास अंसारी ने इस जीत पर कहा कि आज की जीत सिर्फ गठबंधन कार्यकर्ताओं की नही बल्कि गाजीपुर में तमाम साथी जो सच्चाई और हक के लिए लड़ रहे थे .आज उनकी जीत हुई है. पिछले 2 महीनों से गाजीपुर में जो राजनीतिक घमासान और साजिश का दौर चला, आप सभी उससे बखूबी वाकिफ है. इन सबके बावजूद आप सबका इतना प्यार और समर्थन देखकर मैं अभिभूत है. आज आपने गाजीपुर का सम्मान बचा लिया ,आज गाजीपुर की माटी की गंगा जमुना तहजीब बच गई. गाजीपुर ने अफजाल अंसारी साहब को जिता कर आज अपना भविष्य सुरक्षित कर लिया. आप सभी का शुक्रिया और वादा करता हूँ की आपके विश्वास को टूटने नही दूंगा.

सादगी बरकरार

अंसारी परिवार की सादगी भी जनता को अपनी ओर आकर्षित करती है. देश की राजनीति में अंसारी परिवार का कद बहुत बड़ा है इसके बावजूद लोगों के बीच वे आसानी से उपलब्ध रहते हैं. सादगी इस बात से समझी जा सकती है कि जब वह हारे थे तो उन्होंने जितने वाले तत्कालीन बीजेपी विधायक को फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया था. अफजाल कहते हैं की मतभेद होना चाहिए, मनभेद नहीं. 23 मई की सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हुई थी. बसपा प्रत्याशी अफजाल अंसारी ने जो बढ़त ली, तो वह 27वें राउंड तक रुके नहीं. हर राउंड में वह जीत का अंतर बढ़ते ही गए और अंत मे कुल 56,41,144 पाकर जीत का इतिहास रच दिया. वहीं, बीजेपी के मनोज सिन्हा को भी 4,43,188 वोट मिले।

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