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सांसद अफजाल अंसारी जीत के बाद जब पहुंचे घर, तो हुए क्यों भावुक?

अफजाल ने एक समझा हुआ बयान देकर सबको चौंका दिया उन्होंने जीत के बाद सबसे पहले कहा कि मोदी सरकार में एक बार फिर मनोज सिन्हा को मंत्री पद मिलाना चाहिए.

 Special Coverage News |  2 Jun 2019 8:15 AM GMT  |  गाजीपुर

सांसद अफजाल अंसारी जीत के बाद जब पहुंचे घर, तो हुए क्यों भावुक?
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गाजीपुर संसदीय क्षेत्र की पूरे देश में बड़ी चर्चा थी. क्योंकि इस बार यहाँ के सांसद और मोदी सरकार के तत्कालीन मंत्री मनोज सिन्हा का मुकाबला पूर्वांचल के बाहुबली के रूप में गिने जाने वाले मुख़्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी से था. अफजाल ने एक बड़े अंतर से मनोज सिन्हा को हरा दिया. चूँकि जब यूपी में नई सरकार का गठन हो रहा था तब मुख्यमंत्री पद के लिए मनोज सिन्हा का नाम सबसे उपर था. मोदी के सबसे नजदीकी व्यक्ति भी रहे है.

अब इस बड़े चेहरे को हराकर जब अफजाल अंसारी घर लौटे तो बड़े मायूस दिखे. मायूस हों भी क्यों नहीं आज उनके भाई मुख्तार अंसारी इस ख़ुशी के मौके पर घर में नहीं थे. सबकी आँखों में जीत की ख़ुशी तो अपनों को हर जगह ढूढती आँखे नम थी जो तस्वीर में भी दिख रहा है कि सांसद अफजाल अंसारी किसी को ढूढ रहे है. चलो अब किसी और मौके पर मिलेंगे. मुख्तार अंसारी इस समय पंजाब जेल में है.



गाजीपुर संसदीय क्षेत्र से मनोज सिन्हा सांसद हैं और वह केंद्र सरकार में मंत्री रहे हैं. मनोज सिन्हा 3 बार यहां से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. जबकि अफजाल अंसारी ने यह चुनाव दूसरी बार फ़तेह किया है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मनोज सिन्हा ने सपा प्रत्याशी शिवकन्या कुशवाहा को 32,452 मतों के अंतर से हराया था. चुनावी समर में 18 उम्मीदवार थे जिसमें मनोज सिन्हा को 31.11 फीसदी यानी 3,06,929 वोट मिले जबकि दूसरे स्थान पर रही शिवकन्या को 2,74,477 (27.82 फीसदी) वोट हासिल हुए थे. वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के राधे मोहन सिंह ने बसपा के अफजल अंसारी को हराया था. अफजल अंसारी ने 2004 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और विजयी रहे थे.

सीट का नाम: ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश

प्रमुख प्रत्याशी: मनोज सिन्हा (भाजपा) और अफ़ज़ाल अंसारी (बसपा)

नतीजा: अफज़ाल अंसारी ने मोदी सरकार में मंत्री रह चुके मनोज सिन्हा को 1,19,392 वोटों से हराया है.



2014 का नतीजा: मनोज सिन्हा 3.06 लाख वोट पाकर जीते थे. सपा की शिवकन्या कुशवाहा 2.74 लाख वोट पा सकी थीं और बसपा के कैलाश नाथ सिंह यादव 2.41 लाख.

2009 का नतीजा: सपा के राधे मोहन सिंह कर 3.79 लाख वोट पाकर जीते थे. अफ़ज़ाल अंसारी 3.09 लाख वोट पाकर दूसरे स्थान पर थे.

2004 का नतीजा : सपा के अफजाल अंसारी चुनाव जीते थे.

यादवों और दलितों के वोट निर्णायक स्थिति में हैं. इसके अलावा पौने दो लाख मुस्लिम वोटर हैं. इस सीट पर ध्रुवीकरण से ज्यादा पुरानी रंजिश का खेल चला करता है. मनोज सिन्हा भी पुराने सांसद हैं और अफजाल अंसारी भी. दोनों स्कूल में साथ पढ़े थे. बलिया से चुनाव लड़े तो एक दूसरे के खिलाफ, गाज़ीपुर से लड़े तो भी. इलाके के लोग बताते हैं कि किसी भी सांसद के कार्यकाल में गाजीपुर में उतना काम नहीं हुआ, जितना मनोज सिन्हा के कार्यकाल में हुआ.



कारण? मनोज सिन्हा के पास रेल मंत्रालय आया और आगे चलकर दूरसंचार मंत्रालय भी आया. कई योजनाओं को उन्होंने इस इलाके में अंजाम दिया और मनोज सिन्हा के कैबिनेट में चले जाने से सीट भी हाई-प्रोफाइल हो गई थी. मनोज सिन्हा का समर्थन करने वाले इस फैक्टर को भुनाते हैं. अब अफजाल अंसारी ने जीतकर मनोज सिन्हा का तिलिस्म तोड़ दिया है. मनोज सिन्हा की इस हार उन्हें अभी राजनैतिक हासिये पर जरुर ढकेल दिया है. जबकि अफजाल ने एक समझा हुआ बयान देकर सबको चौंका दिया उन्होंने जीत के बाद सबसे पहले कहा कि मोदी सरकार में एक बार फिर मनोज सिन्हा को मंत्री पद मिलाना चाहिए.

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