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नीलू हत्याकांड में ग्राम प्रधान समेत छह नामजद, 2009 के बाद अपने को बदल लिये थे हिस्ट्रीशीटर नीलू सिंह

नीलू के विरु द्ध बरसठी थाने में पहला मुकदमा वर्ष 1991 में 308, 323, 504, 506 का दर्ज हुआ। इसके बाद लगातार एक के बाद एक कर 2009 तक 7 मुकदमा दर्ज हुआ। बीच बीच में जिला बदर, गुंडा एक्ट की कार्रवाई पुलिस द्वारा किया जाता रहा। वर्ष 2009 के बाद से अचानक नीलू ने अपने जीवन में बदलाव कर लिया था।

 Special Coverage News |  7 Sep 2019 5:56 AM GMT  |  जौनपुर

नीलू हत्याकांड में ग्राम प्रधान समेत छह नामजद, 2009 के बाद अपने को बदल लिये थे हिस्ट्रीशीटर नीलू सिंह

जौनपुर। स्थानीय थाना क्षेत्र बरसठी के जरौटा गाँव में गुरु वार की रात पूर्व प्रधान पति की बेरहमी के साथ धारदार हथियार से हत्या कर दिया गया। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर हत्यारोपी फ़रार हो गये। घटना के बाद रात में ही एसपी मौके पर पहुंचे और मातहतों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया था। सुबह होते ही जब पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव मिला तो बरसठी बाजार तिराहे पर शव रखकर चक्का जाम कर दिया। इसके बाद डीएम को मौके पर बुलाने की मांग करने लगे। सुरक्षा की दृष्टि से पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील रहा। सूचना पर पहुंचे डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी से ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को संबोधित छह सूत्रीय मांगपत्र दिया। डीएम के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए।

बताते हैं कि जरौंटा गाँव के पूर्व प्रधानपति प्रेमनारायण सिंह 'नीलू' (49) पुत्र सत्यनारायण सिंह गुरु वार शाम कहीं से वापस अपने घर लौटे थे। परिवारजनों ने बताया कि रात में अपने बरामदे में खाना खा रहे थे। लगभग 9:30 बजे उनके मोबाइल पर किसी का फोन आया और नीलू सिंह परिजन से यह कर चले गये कि 10 मिनट में आ रहा हूँ घर का दरवाजा खुले रखना। परिजन और नीलू सिंह को क्या पता था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात है।

जैसे ही नीलू बुलाये हुए स्थान पर पहुंचे, पहले से ही पूर्व नियोजित ढंग से घात लगाये दुश्मनों ने वार कर दिया और नीलू लहू लुहान होकर गिर पड़े। वहीं से किसी व्यक्ति ने भागते हुए आकर नीलू के घर वालों को घटना की सूचना दी। परिजन भी खाली हाथ ही घटना स्थल की तरफ भागे। मनबढ़ हत्यारों ने नीलू के बड़े भाई लल्ले सिंह के ऊपर भी हमला कर दिए उन्हें भी चोट आई। भगवान का शुक्र रहा कि शायरन बजाते हुए डायल 100 पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस के आने की आहट से हत्यारे मौके से फरार हो गए नहीं तो दोनों भाइयों की मौत मौके पर हो गई होती। परिजनों एवं ग्रामीणों की मदद से पुलिस नीलू सिंह व उनके भाई को स्थानीय चिकित्सक के पास ले गई। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए कहीं और ले जाने की सलाह दिया। परिजन व नीलू के मित्र उन्हें जौनपुर ले गए जहां सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी रात में ही जंगल की आग की तरह पूरे जिले में फैल गई।

थाना निरीक्षक बरसठी घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को देते हुए घटना स्थल पर पहुँचे। क्षेत्राधिकारी मड़ियाहूं अवधेश शुक्ला ने पूरे सर्कल की फोर्स मौके पर बुला कर मोर्चा सभ्भाल लिए और हत्यारोपियों की धर पकड़ में लग गए। उधर पुलिस अधीक्षक रविशंकर छवि, एसपी ग्रामीण संजय राय, सिटी मजिस्ट्रेट अस्पताल में नीलू सिंह को देखने पहुँच गए जहां पहले से ही मौजूद हजारों की संख्या में नीलू के समर्थक अस्पताल में हंगामा कर रहे थे। पुलिस अधीक्षक ने किसी तरह समर्थकों को समझा बुझा कर शांत कराया। शव पोस्टमार्टम के लिए मर्चरी हाउस में रखवाने के बाद सीधे एसपी ग्रामीण संजय राय के साथ सदल-बल रात्रि दो बजे नीलू सिंह के गांव जरौटा बरसठी पहुँच गए। घटनास्थल का जायजा लेने के बाद नीलू के परिजनों से अवश्यक जानकारी ले कर मातहतों को परिजनों की सुरक्षा के साथ साथ हत्यारों को गिरफ्तार करने के सख्त निर्देश दिए। पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है।

अगले दिन शुक्रवार को सुबह से शव मिलते ही बरसठी बाजार बंद कर लोगों ने चक्का जाम कर दिया। समर्थकों ने मुख्यमंत्री से छह सूत्रीय मांग को लेकर शव को बरसठी बाजार के तिराहे पर रखकर चक्का जाम कर मांगें पूरी होने पर ही दाह संस्कार करने की बात कर रहे थे। मृतक के भाई अजित नारायण सिंह की मांग हैं कि जब तक मुख्यमंत्री से बात कर हमारी छह मांगें भाई की विधवा पत्नी और दो नाबालिक बच्चों के जीवन यापन के लिये 50 लाख नकद मुवावजा, दोनों बच्चों की शिक्षा का खर्च सरकार उठायें, परिवार में किसी एक व्यक्ति के नाम लाइसेंसी असलहा, लड़के या लड़की को बालिग होने पर किसी एक को सरकारी या विधवा को सरकारी नौकरी दिया जाय और हत्या में शामिल षडयंत्रकारियों की अविलंब गिरफ्तारी व पूरे घटनाक्रम में शामिल अधिकारियों को अविलंब निलंबित कर जिस रास्ते के विवाद में भाई की जान गई है उसे हल कराएं। बरसठी बाजार से जरौटा तक नीलू सिंह के नाम सड़क एवं बरसठी बाजार में एक गेट बनवाने की घोषणा करें। सूचना पर पहुंचे डीएम ने उन्हें आश्वस्त किया। तब जाकर लोगों ने जाम खोला।

क्षेत्र में नीलू सिंह की थी खास पहचान

गाँव के साथ-साथ क्षेत्र में भी नीलू सिंह की काफी साख थी जिससे गांव की पंचायत में लोग उन्हें बुलाया करते थे और यही नीलू के दुश्मनों को रास नहीं आ रहा था जो उनके हत्या का मुख्य कारण माना जा रहा है। एक तरफ परिजन बिलख रहे थे तो दूसरी तरह समर्थको में हत्या को लेकर जबरजस्त आक्रोश भी देखने को मिला।

चार भइयों में सबसे छोटे थे नीलू

नीलू सिंह चार भाइयों में सबसे छोटे थे। नीलू सिंह को एक पुत्र देव सिंह व एक पुत्री निधि सिंह हैं। नीलू सिंह के बड़े भाई अजित नारायण सिंह के तहरीर पर प्रेम पटेल पुत्र राजाराम, चंद्रसेन पटेल पुत्र बिरजू पटेल, सुशील पटेल पुत्र सिरोममणि पटेल, रामसागर पुत्र अज्ञात एवं प्रेम चन्द्र पटेल पुत्र श्रीपटेल सहित पांच अज्ञात के खिलाफ षणयंत्र के तहत हत्या की तहरीर दी। जिसके आधार बरसठी पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 199/19 धारा 147, 148, 149, 302, 504, 506, 120बी आईपीसी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की धर-पकड़ के लिए पूरी ताकत झोंक दिया है।

2009 के बाद अपने को बदल लिये थे हिस्ट्रीशीटर नीलू सिंह

बरसठी थाना क्षेत्र के जरौटा गांव निवासी प्रेम नारायण सिंह नीलू छात्र जीवन में बदमाशी करने लगे थे। वह थाने के हिस्ट्रीशीटर रहे और उनके विरु द्ध विभिन्न धाराओं में 7 मुकदमे दर्ज हैं लेकिन 10 वर्ष से सब कुछ छोड़कर अचानक जीवन में बदलाव करते हुए सामाजिक जीवन गुजारने लगे थे। उसी समय वर्ष 2010 के प्रधानी चुनाव में पत्नी को प्रधान बनाने के बाद एक दम बदलाव कर लिए थे। ग्राम प्रधानी पद ओबीसी होने के कारण वर्ष 2015 में चुनाव नहीं लड़े और वर्ष 2015 से ही वाराणसी के शिवपुर में परिवार के साथ रहने लगे थे लेकिन गांव की राजनीति में समय-समय पर लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनते रहे और वाराणसी में ही कहीं ठेकेदारी का काम करने लगे थे। जीवन इस समय काफी खुशहाल चल रहा था। नीलू के विरु द्ध बरसठी थाने में पहला मुकदमा वर्ष 1991 में 308, 323, 504, 506 का दर्ज हुआ। इसके बाद लगातार एक के बाद एक कर 2009 तक 7 मुकदमा दर्ज हुआ। बीच बीच में जिला बदर, गुंडा एक्ट की कार्रवाई पुलिस द्वारा किया जाता रहा। वर्ष 2009 के बाद से अचानक नीलू ने अपने जीवन में बदलाव कर लिया था।

बरसठी थाने में दर्ज मुकदमें

1- 21/91 धारा 308, 323, 504, 506

2- 95 में 25 आम्र्स एक्ट का मुकदमा

3- 102/95 धारा 307, 323, 504, 506

4- 90/95 धारा 25 आम्र्स एक्ट

5- 281/95 धारा 307 विस्फोटक सामग्री के साथ

6- 21/98 धारा 307, 342, 506

7- 81/2009 धारा 352, 504, 506

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