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मैं हिंदूवादी दरोगा हूं, मेरा चेहरा पहचान लो, मुझे सिंघम टू कहते हैं!

थानाध्यक्ष भाजपा विधायक से कहते हैं कि इसकी मदद क्यों, यह तो मुसलमानों के साथ रहता है

 Special Coverage News |  8 Sep 2019 4:32 AM GMT  |  लखनऊ

मैं हिंदूवादी दरोगा हूं, मेरा चेहरा पहचान लो, मुझे सिंघम टू कहते हैं!

लखनऊ । रिहाई मंच ने सिद्धार्थनगर में योगी आदित्यनाथ के दौरे से पहले साफ-सफाई के नाम पर उसका बाजार थाना के समीप चाय की छोटी सी दुकान चलाकर गुजर-बसर करने वाले मुरलीधर गुप्ता की दुकान को तहस-नहस करने और उसके बाद जावेद सिद्दीकी को गैरकानूनी हिरासत में रखने और उनके भाई सुहेल सिद्दीकी पर मुकदमा दर्ज करने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। पीड़ित ने जब मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की तो पूरे परिवार समेत उन्हें घर में ही कैद कर दिया गया।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियां तो पहले ही जान ले रही थीं और अब जिस तरह दरोगा खुद को सिंघम और चुलबुल पाण्डेय कहकर जनता को मारपीट रहे हैं उससे हालात और भी बद से बदतर होते जा रहे हैं। पिछले दिनों सिद्धार्थनगर के दौरे के दौरान उसका बाजार थाने के पास मुरलीधर गुप्ता की चाय की दुकान को थानाध्यक्ष के निर्देश पर तोड़े जाने और उसके बाद जावेद नाम के व्यक्ति को अवैध हिरासत में रखने और उसके बाद उनकेे भाई पत्रकार सुहेल को फर्जी मुकदमे में फंसाने की घटना पुलिस की सांप्रदायिक जेहनियत को उजागर करती है।

उन्होंने कहा कि उसका बाजार की घटना जिसमें एक हिंदू व्यक्ति की मदद मुस्लिम व्यक्ति द्वारा करने के आरोप में दोनों को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है वो पिछले दिनों पुलिस की मानसिकता पर स्टेट आफ पुलिसिंग इन इंडिया रिपोर्ट के दावों को सही साबित करता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की नजर में 50 प्रतिशत मुस्लिमों का क्राइम की तरफ झुकाव है। यह भयावह स्थिति है जिसमें हर दो पुलिसकर्मी में से एक को लगता है कि मुस्लिम स्वाभाविक तौर पर ही अपराध की तरफ अग्रसर हो सकते हैं। 35 प्रतिषत पुलिसकर्मिंयों को लगता है कि गौहत्या के मामलों में भीड़ द्वारा दोषियों को सजा देना स्वाभाविक होता है, 43 प्रतिशत पुलिसकर्मी सोचते हैं कि रेप के आरोपी को भीड़ द्वारा सजा देना स्वाभाविक बात है। हर 5 में से 4 पुलिसकर्मियों को लगता है कि अपराध स्वीकार कराने के लिए पुलिस द्वारा अपराधियों को पीटना गलत नहीं होता वहीं हर 5 में से एक पुलिसकर्मी को लगता है कि खतरनाक अपराधियों को लीगल ट्रायल से अच्छा उसको मार देना है।

उसका बाजार थाने के मुरलीधर गुप्ता ने इस बारे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश से भी शिकायत की है। उनका मकान थाना उसका बाजार परिसर की पूर्वी चारदिवारी के करीब है। मकान का एक दरवाजा पूरब सड़क की तरफ तथा दक्षिण में खाली जमीन पर खुलता है। इसी खाली जमीन पर उनकी गुमटी है। गुमटी के दक्षिण में थाने की चारदीवारी से बाहर निकलने का पहले कोई रास्ता नहीं था। लगभग दो साल पहले थाने पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा गुमटी के दक्षिण दिशा में निकलने के लिए पुलिस कर्मियों द्वारा चारदिवारी तोड़ दी गई थी। जिसे बाद में तैनात थानाध्यक्ष ने बंद करवा दिया था।

मौजूदा थानाध्यक्ष अंजनी कुमार राय ने 26 अगस्त को गुमटी को तोड़कर हटवा दिया। 27 अगस्त को कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक श्यामधनी राही थाना परिसर में आए जहां वह उनसे मिलने गया। अपनी बात विधायक को बता रहा था कि थानाध्यक्ष ने कहा कि आप इसकी मदद क्यों कर रहे हैं, यह कटुवों के साथ रहता है। विधायक ने उनसे पूछा तो उसने कहा कि मुसलमान उसके दोस्त हैं जिसपर विधायक ने भी उसे डांटा और उसकी मदद करने से इनकार कर दिया। और थानाध्यक्ष ने उसे गालियां देते हुए थाने से बाहर निकाल दिया। उसी दिन थानाध्यक्ष ने गुमटी की जगह की जमीन खुदवाकर मिट्टी थाना परिसर में डलवा दिया और उसे हवालात में बंद कर दिया। हवालात से निकलवाकर थानाध्यक्ष ने कहा 'मैं हिंदूवादी दरोगा हूं, मेरा चेहरा पहचान लो, मुझे सिंघम टू कहते हैं और जिस कटुए के दम पर तुम फूल रहे हो उस साले की दुकान न बंद करा दिया तो मेरा नाम अंजनी राय नहीं।'

इस जमीन पर मुरली का परिवार लगभग 50-60 साल से रह रहा है। लेकिन अंजनी कुमार राय ने 29 अगस्त को चारदिवारी की पूर्वी दीवार को तोड़कर वहां पर नया गेट स्थापित कर दिया। यह आपराधिक कृत्य उसकी रोजी-रोटी छीनने के उद्देश्य से किया गया। गुमटी हटाने का विरोध करने पर मुरली की पत्नी कुसुम को अंजनी कुमार राय ने गालियां देते हुए धमकी दी कि विरोध किया तो तुम्हें और तुम्हारे पति को नंगा करके थाने ले जाया जाएगा और बच्चों सहित पूरे परिवार को जेल भेजकर जीवन बर्बाद कर दिया जाएगा। कहीं से मदद न मिलने पर मुरली 30 अगस्त को पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर से मिलने गया। मुलाकात न हो सकी तो कार्यालय में अपना प्रार्थनापत्र देकर जिलाधिकारी से मिलने चला गया। उनके सामने अपनी फरियाद सुनाते हुए प्रार्थनापत्र दिया जिसे उन्होंने अन्य किसी अधिकारी को सौंप दिया।

जिलाधिकारी के जाते ही मीडिया ने उससे बात की। इसका वीडियो वायरल हुआ। 31 अगस्त को सिद्धार्थनगर में मुख्यमंत्री आने वाले थे और उसी दिन अंजनी राय ने मुरली के घर पर शैलेष शर्मा और गणेश सिंह कांस्टेबल को भेजकर कहलवाया कि घर से बाहर निकले तो तुम्हारी खैर नहीं। 1 सितंबर को उसके घर पर दो लेखपालों ने आकर बयान दर्ज किया। लगभग दो घंटे बाद उपजिलाधिकारी तथा उपपुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर थाने में आए और उसे और उसकी पत्नी को बुलाकर मौके पर चलने को कहा। थोड़ी देर बाद पता लगा कि जावेद सिद्दीकी को अंजनी कुमार राय ने उसकी दुकान से उठाकर थाने में बैठा दिया। मुरली पर सुलह कर लेने का दबाव बनाया गया।

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